शामली में वायु प्रदूषण का कहर जारी, AQI 300 पार, सांस लेना हुआ दूभर
शामली जिले में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ा हुआ है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 दर्ज किया गया, जो हवा की अत्यंत खराब गुणवत्ता को दर्शाता है। पिछले 26 दिनों से AQI का स्तर लगातार 250 के पार बना हुआ है, और इसके जल्द घटने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
प्रदूषित हवा के कारण लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में घुटन महसूस हो रही है। विशेषकर सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षण डॉ. दीपक कुमार के अनुसार, स्मॉग के कारण अस्थमा और अन्य सांस के रोगियों को काफी परेशानी हो रही है। उनकी सांस फूलने लगती है और उन्हें अत्यधिक तकलीफ का सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में ऐसे रोगियों को घर के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुजफ्फरनगर के क्षेत्रीय अधिकारी गीतेश चंद्रा ने बताया कि मुजफ्फरनगर के सापेक्ष आंकड़ों के आधार पर शामली का AQI 300 के आसपास अनुमानित है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, जिला कृषि अधिकारी प्रदीप यादव ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसल के अवशेषों को न जलाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्थान पर फसल अवशेष जलाए जाते पाए गए, तो संबंधित व्यक्ति को चिह्नित कर उस पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती बरती जा रही है, जैसा कि पहले शुगर मिल पर 5.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर भी स्पष्ट किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक लोगों को बाहरी गतिविधियों को कम करना चाहिए और मास्क का प्रयोग करना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। हवा की गुणवत्ता में यह गिरावट न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है।
