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कड़ाके की सर्दी बच्चों की सेहत पर भारी, अस्पतालों में बढ़ा ‘Respiratory Illness’ का प्रकोप

By Jan 3, 2026

कड़ाके की ठंड नौनिहालों की सेहत पर भारी पड़ रही है। नवजात शिशुओं से लेकर पांच साल तक के बच्चे सर्दी, खांसी, बुखार और जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों की इमरजेंसी में रोजाना 20 से 25 बच्चे गंभीर अवस्था में भर्ती हो रहे हैं। सिक न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) और एनआईसीयू के ज्यादातर बेड भरे हुए हैं, जिससे गंभीर बच्चों को भर्ती करने में मुश्किलें आ रही हैं।

अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या

लोहिया संस्थान के बाल रोग विभाग की ओपीडी में सामान्य दिनों के मुकाबले प्रतिदिन 50 से अधिक बच्चे आ रहे हैं, जिनकी संख्या 200 पार कर गई है। इसी तरह केजीएमयू में भी ओपीडी में आने वाले बच्चों की संख्या 200 से बढ़कर 250 से अधिक हो गई है। ट्रॉमा सेंटर एनआईसीयू के 52 बेड में से ज्यादातर भरे हुए हैं। कई बार दूर-दराज से आए बच्चों के परिजनों को दूसरे अस्पतालों में जाने की सलाह देनी पड़ रही है। सिविल अस्पताल और डफरिन अस्पताल के बाल रोग वार्ड भी मरीजों से भरे हुए हैं। डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान के अनुसार, ओपीडी में आने वाले 70 से 80 फीसदी बच्चे सांस की बीमारी से संबंधित हैं, जिनमें से 10 से 15 फीसदी निमोनिया से ग्रसित पाए जाते हैं।

निमोनिया के लक्षण और बचाव

डॉ. सलमान ने निमोनिया के प्रमुख लक्षणों में सामान्य से तेज सांस चलना, सांस लेने में परेशानी, छाती में दर्द, खांसी के साथ पीले या हरे रंग का बलगम, तेज बुखार, कंपकंपी, होंठ या नाखून का नीला पड़ना, उल्टी और पेट या सीने के निचले हिस्से में दर्द शामिल बताए। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को सर्दी-जुकाम होने पर तुरंत चिकित्सक से दिखाना चाहिए और अपनी मर्जी से दवा नहीं देनी चाहिए। कमरे में ब्लोअर का इस्तेमाल करते समय नमी बनाए रखने के लिए पानी का बर्तन रखना चाहिए और बच्चे को अचानक ठंडे या गर्म वातावरण में ले जाने से बचना चाहिए।

बच्चों को निमोनिया से बचाने के उपाय

छोटे बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए संक्रमित व्यक्तियों से दूर रखना चाहिए। बच्चों को नंगे पैर नहीं घूमने देना चाहिए, हवा और प्रदूषण से बचाना चाहिए, और गर्म कपड़े पहनाने चाहिए। तीन दिन से अधिक खांसी-जुकाम होने पर जांच करवानी चाहिए। ठंडे खाद्य पदार्थ नहीं खिलाने चाहिए। छह माह तक के बच्चे को केवल मां का दूध पिलाना चाहिए। बिना विशेषज्ञ की सलाह के एंटीबायोटिक या नेबुलाइजर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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