कश्मीर पर नेहरू की नीति के खिलाफ थे सरदार पटेल, LG सिन्हा ने बताई पूरी कहानी
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि अगर लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को 1947 में जम्मू कश्मीर के एकीकरण की पूरी जिम्मेदारी दी गई होती तो आज जम्मू-कश्मीर का इतिहास अलग होता। सिन्हा ने वडोदरा गुजरात में ‘सरदार @150 यूनिटी मार्च’ के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही।
उपराज्यपाल ने कहा कि सरदार पटेल शुरू से ही इसकी वकालत करते रहे कि जम्मू कश्मीर का एक इंच भी पाकिस्तान को नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने जम्मू कश्मीर के प्रति तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीति का विरोध किया था। वह इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के खिलाफ थे।
सिन्हा ने कहा कि अपनी एक सार्वजनिक रैली में सरदार पटेल ने जम्मू कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के बारे में स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी निर्णायक कार्रवाई इतिहास की दिशा बदल देगी। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की एकता, आदर्शों, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों ने हमारे राष्ट्र के विकास को आकार देना जारी रखा है। आधुनिक भारत के वास्तुकार के रूप में सरदार पटेल भारत के आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और उसकी बहादुरी का प्रतीक हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरदार पटेल के सपनों और दृष्टिकोण को पूरा कर रहे हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाकर पूरे भारत को एकता के सूत्र में पिरोया और एक देश में एक झंडा, एक संविधान और एक नेता के संकल्प को साकार किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री की पहल- ‘एक राष्ट्र, एक कर’, ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’, ‘एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य कार्ड’, ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड’, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’, ‘पीएम गति शक्ति’ आदि कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों ने देश की एकता को मजबूत किया है और हम सभी के भीतर राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत बनाया है। उन्होंने युवाओं से एकता के स्तंभों को मजबूत करने का आह्वान किया।
