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सेना का ‘रैम प्रहार’ युद्धाभ्यास: देवभूमि से पाकिस्तान को कड़ा संदेश

By Nov 23, 2025

देवभूमि उत्तराखंड से भारतीय सेना ने एक बार फिर अपनी अदम्य शक्ति और भविष्य की युद्ध तैयारियों का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। हरिद्वार के झिलमिल झील रिजर्व फारेस्ट क्षेत्र में करीब 12,000 सैनिकों और अफसरों ने एक महीने तक चले ‘रैम प्रहार’ युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया, जिसका शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस युद्धाभ्यास ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना ‘हर काम देश के नाम’ को समर्पित भाव से सीमाओं की रक्षा के लिए शारीरिक, तकनीकी और मानसिक रूप से हर चुनौती का सामना करने को तैयार है।

युद्धाभ्यास के दौरान, टैंकों और सैनिकों ने कांटों भरी झाड़ियों, पथरीले रास्तों और छोटी पहाड़ियों जैसी दुष्कर भौगोलिक परिस्थितियों में अपने युद्ध कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। टैंकों ने नदी तक पहुँच बनाई और मिनटों में ही उन पर पुल बनाकर उन्हें सुरक्षित पार कराया गया। गोलियों की बौछार के बीच जमीन, पानी और हवा, तीनों ही माध्यमों से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले का अभ्यास किया गया। इसमें एयरक्राफ्ट, अटैक रैप्टर्स और ड्रोन की सहायता ली गई, जिन्होंने दुश्मन के ठिकानों की पहचान कर उन पर निर्णायक वार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय सेना के पश्चिमी कमान की खड़ग कोर के अंतर्गत आने वाली चार्जिंग रैम डिवीजन द्वारा आयोजित इस युद्धाभ्यास में सेना, वायुसेना और अन्य सेवाओं के बीच अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिला। यह अभ्यास इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना अब अधिक तेज, आधुनिक, तकनीक-सक्षम और बहु-क्षेत्रीय युद्ध क्षमता के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। युद्धाभ्यास से पहले, रैम डिविजन ने विभिन्न युद्धाभ्यास ड्रिल्स और टैक्टिक्स–टेक्नीक–प्रोसीजर (टीटीपी) का गहन परीक्षण किया था। इस दौरान तोपखाना, पैदल सेना, इंजीनियर और आर्मी एविएशन ने मिलकर वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में समन्वित अभियान चलाया।

इस युद्धाभ्यास की एक खास बात यह रही कि इसमें अधिकतर उपकरणों का स्वदेशी इस्तेमाल किया गया। सेना ने अपनी विशिष्ट जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ड्रोन सहित कई अत्याधुनिक उपकरण विकसित किए हैं। अभ्यास में शामिल आईआरएस (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकानिसेंस) सिस्टम, एआइ आधारित निर्णय सहायता तंत्र और नेटवर्क-सक्षम कमांड–कंट्रोल सिस्टम ने जटिल और तकनीक-प्रधान युद्धक्षेत्रों में भारतीय सेना की त्वरित और सटीक निर्णय लेने की क्षमता को उजागर किया। यह युद्धाभ्यास न केवल भारतीय सेना की बढ़ती ताकत का प्रतीक है, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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