साइबर ठगों का नया जाल: एटीएस अधिकारी बनकर बुजुर्ग से ठगे 27 लाख
साइबर ठगों ने अब बुजुर्गों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ठग खुद को आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का अधिकारी बताकर पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ते हुए उन्हें जाल में फंसा रहे हैं। इसी तरह की एक घटना में, जानकीपुरम निवासी 77 वर्षीय रामशंकर त्रिवेदी से पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 27 लाख रुपये की ठगी की गई। पीड़ित ने इस संबंध में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार, सात नवंबर की दोपहर रामशंकर त्रिवेदी के पास एक व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए कहा कि वे पहलगाम आतंकी हमले की साजिश में शामिल हैं और उन्होंने आतंकियों को 70 करोड़ रुपये पहुंचाए हैं, जिसमें उन्हें 70 लाख रुपये कमीशन मिला है। यह सुनकर रामशंकर त्रिवेदी डर गए और उन्होंने आरोपों से इनकार किया, लेकिन उन्हें डपट दिया गया।
इसके तुरंत बाद, उनके पास एक वीडियो कॉल आई, जिसमें वर्दीधारी अधिकारी ने खुद को एनआईए अधिकारी बताया। उसने धमकी दी कि आतंकी हमले की साजिश से जुड़ी रकम उनके खाते में भेजी गई है और सर्विलांस के माध्यम से उन पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के तहत उन्हें देशद्रोही मानकर गिरफ्तार किया जाएगा और वे चाहकर भी भाग नहीं पाएंगे।
जब रामशंकर त्रिवेदी ने कहा कि उनके खाते में कोई रकम नहीं आई थी, तो कथित अधिकारियों ने जांच की बात कही और आश्वासन दिया कि अगर गलती नहीं मिलेगी तो सारी रकम वापस कर क्लीनचिट दे दी जाएगी। हालांकि, इस दौरान उन्हें किसी से भी कुछ भी न बताने की सख्त हिदायत दी गई, अन्यथा उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनका बाकी जीवन सलाखों के पीछे ही कटेगा।
तीन दिनों तक डराने-धमकाने के बाद, जालसाजों ने पीड़ित को दो बैंक खाते दिए और उन पर 27 लाख रुपये जमा करने को कहा। डर के मारे, रामशंकर त्रिवेदी ने 10 नवंबर को 10 लाख रुपये और 11 नवंबर को 17 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। इसके बाद जालसाजों की मांग और बढ़ने लगी, जिस पर पीड़ित को आशंका हुई और उन्होंने फोन काट दिया।
जब उन्होंने परिवार वालों को आपबीती सुनाई, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर जालसाजों का शिकार हुए हैं और उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया था। इसके बाद उन्होंने तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर थाने में तहरीर दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जालसाजों ने जिन दो बैंक खातों में रुपये मंगवाए थे, उन्हें फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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