आईएसआई की नई चाल: विदेश पढ़ रहे भारतीय छात्रों को बना रहा कट्टरपंथी
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रही है। फरीदाबाद में पकड़े गए ‘सफेदपोश माड्यूल’ के बाद भारतीय एजेंसियों की पैनी नजर से बचने के लिए आईएसआई ने अब विदेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। एजेंसी की मंशा है कि ये छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत लौटें और यहां आतंकी मॉड्यूल स्थापित कर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दें।
खुफिया एजेंसियों ने इस गहरी साजिश के प्रति आगाह किया है। एक अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई विशेष रूप से बांग्लादेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों, खासकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वालों को कट्टरपंथी बनाने के लिए जमात-ए-इस्लामी के साथ मिलकर एक पूरा इको-सिस्टम तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और ‘सफेदपोश’ मॉड्यूल की तरह ही गुप्त तरीके से काम करने वाले आतंकी समूह तैयार करना है।
यह रणनीति खास तौर पर उन छात्रों को लक्षित कर रही है जो मेडिसिन या इंजीनियरिंग जैसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पढ़ रहे इन छात्रों की पहचान के लिए आईएसआई ने एक विशेष टीम बनाई है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना इन कॉलेजों से छात्रों को चुनकर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे हैं। इन छात्रों को भड़काने के लिए आईएसआई ने विभिन्न देशों में मौजूद कट्टर मौलवियों से भी संपर्क साधा है।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ‘सफेदपोश’ आतंकवादी अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि उनका पेशा उन्हें छिपने का मौका देता है और वे अक्सर पकड़े नहीं जाते। इसके अतिरिक्त, वे इंटरनेट और वेब की दुनिया में अधिक माहिर होते हैं, जिससे उन्हें गुप्त रूप से संवाद करने और साजिशें रचने में आसानी होती है। एजेंसियों द्वारा लगभग 12,000 ऐसे छात्रों के पिछले रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, जिन्होंने हाल के वर्षों में विदेश में इन विशिष्ट पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है। इनमें से वे छात्र भी शामिल हैं जो 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान बांग्लादेश में चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे थे।
