महरोली के हौज-ए-शम्सी का कायाकल्प: 35 करोड़ से होगा ऐतिहासिक तालाब का पुनरुद्धार, दिल्ली को मिलेगा नया रूप
दिल्ली के महरौली इलाके में स्थित 13वीं सदी का ऐतिहासिक जलाशय हौज-ए-शम्सी, जो लंबे समय से प्रदूषण की मार झेल रहा था, अब अपनी खोई हुई भव्यता वापस पाने की राह पर है। दिल्ली सरकार ने इस ऐतिहासिक धरोहर के कायाकल्प के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य इसे कचरे और सीवेज के प्रभाव से मुक्त करना है।
यह जलाशय दिल्ली सल्तनत के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा 13वीं शताब्दी में बनवाया गया था। किंवदंतियों के अनुसार, सुल्तान को एक सपने में पैगंबर एक घोड़े पर सवार दिखे, जिसके बाद वे उसी स्थान पर पहुंचे जहां घोड़े के खुर का निशान और एक प्राकृतिक जल स्रोत मिला। इसी आधार पर उन्होंने इस विशाल तालाब का निर्माण करवाया। तालाब के बीच में 12 स्तंभों वाला एक गुंबदनुमा मंडप है, जो उस खुर के निशान को संरक्षित करता है। इसके पास ही जहाज महल भी स्थित है, जो लोदी काल की वास्तुकला का प्रतीक है। कभी 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला यह तालाब अब सिकुड़कर मात्र 7 एकड़ रह गया है।
प्रदूषण का इतिहास और संरक्षण के प्रयास
पिछले कई वर्षों से आसपास के इलाकों से सीवेज का पानी इस तालाब में रिस रहा था, जिससे जल की गुणवत्ता लगातार गिर रही थी। किनारों पर कचरा फेंके जाने से कीचड़ जमा हो गया था और मूल लाल बलुआ पत्थर की संरचना भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। स्थानीय निवासी लंबे समय से गंदे पानी और तालाब से आने वाली बदबू की शिकायत कर रहे थे। 2015 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सफाई के प्रयास किए गए थे, लेकिन वे आंशिक रूप से ही सफल रहे। हाल के वर्षों में SEEDS संस्था ने भी ASI की देखरेख में सफाई अभियान चलाए थे।
नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से मिलेगी निजात
अब दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने वसंत कुंज सेक्टर A में 4.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) क्षमता का एक नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाने का काम शुरू कर दिया है। यह STP तालाब को नियमित रूप से साफ पानी की आपूर्ति करेगा, जिससे पानी का ठहराव समाप्त होगा और प्रदूषण को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। इस परियोजना से न केवल ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण में भी सुधार आएगा।
परियोजना का वित्तीय और समय-सीमा
इस परियोजना की कुल लागत लगभग 35 करोड़ रुपये अनुमानित है। इसमें से 15.66 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) योजना के तहत प्राप्त होंगे, जबकि 20.17 करोड़ रुपये का संचालन और रखरखाव खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। यह STP 750 वर्ग मीटर जमीन पर बनाया जाएगा और डिजाइन-बिल्ड-ऑपरेट मॉडल पर आधारित होगा, जिसके तहत डेवलपर 15 साल तक प्लांट का संचालन करेगा। बोली प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और फरवरी तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। निर्माण कार्य में लगभग एक साल और प्लांट को चालू करने में तीन महीने का समय लगेगा। इस परियोजना के पूरा होने से दिल्ली को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल वापस मिलेगा, जो पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
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