रूस में भारत की राजनयिक पहुंच का विस्तार: छात्रों और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को रूस में दो महत्वपूर्ण भारतीय वाणिज्य दूतावासों का उद्घाटन कर भारत की राजनयिक पहुंच का विस्तार किया है। येकातेरिनबर्ग और कजान शहरों में खोले गए इन नए महावाणिज्य दूतावासों से अब तक सेंट पीटर्सबर्ग और व्लादिवोस्तोक में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावासों की संख्या में वृद्धि हुई है।
इस विस्तार का सबसे बड़ा लाभ रूस में अध्ययनरत भारतीय छात्रों को मिलेगा। वर्तमान में रूस में 30,000 से अधिक भारतीय छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें से अनुमानित 10,000 छात्र इन नए खोले गए वाणिज्य दूतावासों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। यह कदम छात्रों के लिए कांसुलर सेवाओं की उपलब्धता और पहुंच को आसान बनाएगा, जिससे उनकी शैक्षणिक यात्रा सुगम होगी।
इन वाणिज्य दूतावासों की स्थापना केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत और रूस के बीच समग्र द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सूत्रों के अनुसार, इन दूतावासों से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।
यह पहल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सहायक सिद्ध होगी। विदेश मंत्री जयशंकर ने येकातेरिनबर्ग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे इसके औद्योगिक महत्व के कारण अक्सर रूस की तीसरी राजधानी कहा जाता है और यह साइबेरिया का प्रवेश द्वार है। यहाँ वाणिज्य दूतावास की स्थापना से भारतीय और रूसी उद्योगों के बीच तकनीकी, वैज्ञानिक, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को सक्षम और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इसी तरह, कजान, जिसने हाल ही में 2024 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, को एक बहु-सांस्कृतिक केंद्र बताया गया है जो रूस और शेष एशिया के बीच एक सेतु का काम करता है। इन रणनीतिक स्थानों पर नए वाणिज्य दूतावासों का खुलना भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘एक्ट फार ईस्ट’ नीतियों के अनुरूप है, जो रूस के साथ संबंधों को और गहरा करने पर जोर देती हैं।
