महिषी के गौरवशाली इतिहास पर डाक टिकट, सहरसा में उपलब्धता पर सवाल
सहरसा जिले के महिषी का नाम मंडन मिश्र और आदि शंकराचार्य के ऐतिहासिक शास्त्रार्थ के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसी गौरवशाली इतिहास को संजोने के उद्देश्य से डाक विभाग ने ‘मंडन मिश्र-शंकराचार्य शास्त्रार्थ’ पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया है। यह किसी जिले के ऐसे पहले ऐतिहासिक प्रसंग पर जारी किया गया डाक टिकट है, जिससे यह भारत सरकार के अभिलेखों में जीवंत रहेगा।
हालांकि, यह विशेष डाक टिकट जारी होने के करीब तीन महीने बाद भी सहरसा के डाकघरों में उपलब्ध नहीं हो पाया है। पटना में राज्य स्तरीय डाक टिकट संग्रह प्रदर्शनी के दौरान इसे प्रदर्शित किया गया था, लेकिन स्थानीय लोग अपने इतिहास से जुड़े इस टिकट को खरीदने के लिए डाकघर जाते हैं तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। लोगों का कहना है कि जब सहरसा के इतिहास को डाक विभाग में जगह मिली है, तो उसका टिकट यहां उपलब्ध न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
स्थानीय शिक्षाविद दिलीप चौधरी ने बताया कि वे दो बार इस टिकट को खरीदने की कोशिश कर चुके हैं, ताकि अपने गांव के इतिहास को सहेज सकें। उन्होंने कहा कि नए पीढ़ी के लोग इस डाक टिकट के माध्यम से इस ऐतिहासिक प्रसंग से अवगत हो सकेंगे। उन्होंने सरकार से इसे जल्द उपलब्ध कराने की अपील की है।
पर्यटन विभाग द्वारा महिषी में उग्रतारा मंदिर और मंडन मिश्र धाम का विकास किया जा रहा है। करीब 14 करोड़ की लागत से मंडन मिश्र और शंकराचार्य के शास्त्रार्थ स्थल पर एक कॉरिडोर का निर्माण भी चल रहा है, ताकि इस इतिहास को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा सके।
