उत्तर प्रदेश में `UP religious conversion` के आरोपों से गरमाई सियासत, प्रार्थना सभाओं पर उठ रहे सवाल
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों `UP religious conversion` का मुद्दा गरमाया हुआ है। कानपुर और चित्रकूट धाम मंडल के साथ-साथ फतेहपुर, उन्नाव, चित्रकूट और कन्नौज में ईसाई मिशनरियों पर प्रार्थना सभाओं के माध्यम से लोगों को मतांतरण के लिए प्रेरित करने के आरोप लग रहे हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है और वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
आरोप है कि मतांतरण कराने वाले लोग मुख्य रूप से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्हें सिलाई मशीन, 1500 से 2000 रुपये प्रतिमाह जैसे प्रलोभन देकर इन प्रार्थना सभाओं में बुलाया जाता है। इन सभाओं में कथित तौर पर बीमारी ठीक करने के नाम पर लोगों को इकट्ठा किया जाता है और उन्हें अपने देवी-देवताओं के प्रति भड़काने का प्रयास किया जाता है।
उन्नाव के दही क्षेत्र के घटोरी गांव में हाल ही में एक ऐसी ही प्रार्थना सभा को लेकर हंगामा हुआ, जहां 70-80 लोग इकट्ठा थे। इसी तरह की घटनाएं फतेहपुर, चित्रकूट और कन्नौज में भी सामने आ चुकी हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों के लिए इन मामलों में ठोस कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि शिकायतकर्ता अक्सर नहीं मिलते या फिर साक्ष्य जुटाने में परेशानी आती है।
पुलिस ने कई मामलों में निषेधाज्ञा उल्लंघन के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं, लेकिन सीधे तौर पर मतांतरण के प्रमाण न मिलने की बात कही जा रही है। पुलिस का कहना है कि जहां भी मतांतरण के प्रमाण मिलते हैं, मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। हालांकि, हिंदू संगठन इस बात पर जोर दे रहे हैं कि प्रार्थना सभाओं में दूसरे धर्म के लोगों को इकट्ठा करना और बाइबिल जैसी धार्मिक पुस्तकें मिलना ही जांच का विषय है। इस पूरे प्रकरण ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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