अलीगढ़ के छर्रा क्षेत्र में बरौली-हबीबपुर बाईपास सड़क की दुर्दशा ने स्थानीय लोगों को विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर कर दिया है। यह सड़क पिछले 25 वर्षों से उपेक्षा का शिकार है और अब यह...
अलीगढ़ के छर्रा क्षेत्र में बरौली-हबीबपुर बाईपास सड़क की दुर्दशा ने स्थानीय लोगों को विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर कर दिया है। यह सड़क पिछले 25 वर्षों से उपेक्षा का शिकार है और अब यह केवल उखड़े पत्थरों और गहरे गड्ढों का ढेर बनकर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग उनके लिए ‘वनवास’ जैसा हो गया है, जहाँ पैदल चलना भी दूभर है।
छर्रा कस्बे की लाइफलाइन, फिर भी उपेक्षित
यह 2.5 किलोमीटर लंबा बाईपास मार्ग केवल ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि छर्रा कस्बे की यातायात व्यवस्था के लिए भी ‘लाइफलाइन’ है। जब भी सांकरा की ओर से आने वाले वाहनों के कारण छर्रा कस्बे में जाम लगता है, तो सारा ट्रैफिक इसी बाईपास से होकर गुजरता है। छर्रा अनाज मंडी जाने वाले भारी वाहन और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भी इसी रास्ते का उपयोग करती हैं। धान के सीजन में यहाँ की स्थिति नरकीय हो जाती है, जहाँ भारी वाहनों के फंसने से घंटों तक रास्ता बंद रहता है।
25 साल पहले हुआ था निर्माण
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण मार्ग का निर्माण लगभग ढाई दशक पहले पूर्व विधायक स्व. डॉ. राम सिंह के कार्यकाल में हुआ था। उसके बाद से आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने इस सड़क की मरम्मत की सुध नहीं ली। 25 साल बीत जाने के बाद अब सड़क का नामोनिशान मिट चुका है। उखड़े हुए नुकीले पत्थरों के कारण वाहनों के टायर फटना और दोपहिया वाहनों का फिसलना आम बात हो गई है। बरसात के दिनों में इस मार्ग की हालत और खस्ता हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का संपर्क तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है।
किसानों को हो रहा भारी नुकसान
किसानों का कहना है कि फसल से लदी ट्रॉलियां इन गड्ढों में पलटते-पलटते बचती हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। मंडी जाने वाले वाहनों के फंसने से किसानों को समय पर अपनी उपज बेचने में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए तत्काल सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि क्षेत्र के लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके।