रोजगार सेवकों को पुलिस ने रोका, विधानभवन की ओर कूच का प्रयास, UP politics news
लखनऊ में ग्राम पंचायत स्तर पर मनरेगा योजना के तहत काम करने वाले रोजगार सेवकों ने अपनी मांगों को लेकर बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए इन कर्मचारियों ने हजरतगंज स्थित दरुलशफा के सामने एकत्र होकर राज्य कर्मचारियों का दर्जा देने सहित 10 सूत्रीय मांगों को उठाया। प्रदर्शनकारियों ने विधानभवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया और ईको गार्डेन भेज दिया।
ग्राम रोजगार सेवक (पंचायत मित्र) वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप द्विवेदी ने बताया कि करीब 36 हजार रोजगार सेवक 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वे आज तक सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को सफल बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद उपेक्षा की जा रही है। यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
इस बीच, ईको गार्डेन में एक रोजगार सेवक ने पेड़ पर चढ़कर फांसी लगाने का प्रयास किया, जिसे अन्य प्रदर्शनकारियों और पुलिस की मदद से नीचे उतारा गया। इस घटना ने प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को और बढ़ा दिया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि 12 से 18 महीने का मानदेय बकाया होने के कारण वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में ग्राम पंचायतों में सहायक सचिव का पद सृजित कर समायोजन, राज्य कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक मानदेय वाली मानव संसाधन नीति, मासिक मानदेय भुगतान के लिए अलग बजट, बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान, मोबाइल फोन और डाटा रिचार्ज की सुविधा, तथा न्याय पंचायत पर स्थानांतरण की व्यवस्था लागू करना शामिल है। दोपहर में, रोजगार सेवकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव व आयुक्त ग्राम विकास के साथ वार्ता की।
