राहुल गांधी पर पीयूष गोयल और निर्मला सीतारमण का तीखा पलटवार, संसद में बहस की चुनौती | india politics
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक बहस के लिए आमंत्रित करने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी साल 2014 से लगातार खुद से ही बहस कर रहे हैं। इस सियासी रार के बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि क्या विपक्ष के नेता सदन के भीतर अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह सोशल मीडिया पर चुनौतियां देने के बजाय संसद में आएं, जहां वे खुद नेता प्रतिपक्ष के पद पर हैं। गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का हवाला दिया गया जिसमें सरकार ने एसआईआर और ईवीएम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विशेष सत्र के दौरान चर्चा करने की पेशकश की थी। मंत्रियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी और उसका गठबंधन अक्सर संसद की कार्यवाही को बाधित करता है और सरकार का जवाब सुने बिना सदन से वॉकआउट कर जाता है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा का हवाला देते हुए मंत्रियों ने राहुल गांधी द्वारा हाल ही में आयोजित की गई ‘मॉक संसद’ को सदन का मजाक करार दिया। जनता के बीच इन राजनीतिक बहसों का सीधा असर विधायी कामकाज और नीतिगत फैसलों पर पड़ता है, जिससे आम जनता के अहम मुद्दों पर संसद के भीतर होने वाली चर्चाएं अक्सर बाधित हो जाती हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष यदि वास्तव में गंभीर है, तो उसे सदन के नियमों के तहत तथ्यात्मक चर्चा का हिस्सा बनना चाहिए।
