पूर्व राज्यमंत्री गोरख प्रसाद निषाद का लखनऊ में 82 वर्ष की आयु में निधन
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा, पूर्व राज्यमंत्री गोरख प्रसाद निषाद का शुक्रवार को लखनऊ में निधन हो गया। उन्होंने 82 वर्ष की आयु में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांसें लीं। देवरिया जिले के बरहज नगर के मूल निवासी गोरख प्रसाद निषाद का राजनैतिक सफर जनसंघ के साथ शुरू हुआ था, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
सूत्रों के अनुसार, गोरख प्रसाद निषाद अपने बेबाक अंदाज और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे। आपातकाल के दौरान, 1976 में, उन्होंने देश में लागू आपातकाल का पुरजोर विरोध किया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें लगभग दो महीने जेल की सजा काटनी पड़ी थी। यह उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय था, जिसने उनकी जुझारू प्रवृत्ति को उजागर किया।
भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद, निषाद ने संगठन में सक्रिय सहभागिता निभाई और पार्टी को मजबूत करने में योगदान दिया। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान भी वे सक्रिय रहे और एक बार फिर जेल गए। उनकी निष्ठा और समर्पण को देखते हुए, 1997 में भाजपा सरकार ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया और कल्याण सिंह की सरकार में पशुधन, मत्स्य एवं श्रम राज्य मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।
उनके निजी सचिव रहे सुनील कुमार निषाद ने बताया कि गोरख प्रसाद निषाद लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका जन्म 15 जुलाई 1943 को बरहज में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बरहज और गोरखपुर में प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने नगर के बाबा गयादास इंटर कॉलेज में अध्यापन कार्य भी किया, लेकिन राजनीति का आकर्षण उन्हें अपनी ओर खींच लाया।
पूर्व मंत्री के निधन पर राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान, विधायक दीपक मिश्र शाका, नपाध्यक्ष श्वेता जायसवाल सहित कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने निषाद के निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया है।
their final journey, the last rites of former minister Gorakh Prasad Nishad were performed at the Saryu Ghat in Barhaj, where a large number of people gathered to pay their last respects.
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