पटना में 48 हजार मतदाताओं ने नकारा प्रत्याशी, नोटा बना तीसरा सबसे बड़ा विकल्प
पटना, जागरण। बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों में पटना जिले से एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है, जो राजनीतिक दलों के लिए गहरी चिंता का विषय बन सकता है। जिले की 14 विधानसभा सीटों पर कुल 48,558 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को वोट न देकर ‘नोटा’ (NOTA – None Of The Above) का विकल्प चुना। यह संख्या दर्शाती है कि मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग मौजूदा उम्मीदवारों से संतुष्ट नहीं है और उन्हें कोई भी विकल्प उपयुक्त नहीं लगा।
चुनाव आयोग द्वारा 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ईवीएम में नोटा बटन को अंतिम विकल्प के रूप में जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य मतदाताओं को यह अधिकार देना था कि यदि उन्हें कोई भी उम्मीदवार पसंद न हो तो वे अपनी असहमति दर्ज करा सकें। पटना के आंकड़ों के अनुसार, यह अधिकार अब एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश बन गया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो, पटना जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में नोटा तीसरे स्थान पर रहा। इनमें दानापुर, दीघा, बांकीपुर, मोकामा, बाढ़ और मसौढ़ी शामिल हैं। मसौढ़ी में सबसे अधिक 5146 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया, जबकि कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 1278 वोट नोटा को मिले, फिर भी यह आंकड़ा कम नहीं है। बख्तियारपुर, कुम्हरार और फुलवारीशरीफ में नोटा चौथे स्थान पर रहा, वहीं पालीगंज में यह छठे नंबर पर रहा।
यह स्थिति दर्शाती है कि मतदाताओं में प्रत्याशियों के चयन को लेकर एक गहरा असंतोष है। इतनी बड़ी संख्या में नोटा का चुनाव करना यह संकेत देता है कि राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया और जनता से जुड़ाव पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। यह न केवल उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन है, बल्कि भविष्य के चुनावों में बेहतर और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की दिशा में एक स्पष्ट चेतावनी भी है।
