प्रदूषण की सीमाएं नहीं, एयरशेड मॉडल से समाधान की जरूरत
वायु प्रदूषण की समस्या किसी एक देश या भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडो-गंगा मैदान, हिमालय की तराई और हिंदू कुश हिमालय जैसे बड़े क्षेत्रों को प्रभावित करती है। इस जटिल चुनौती का समाधान केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से ही संभव है। इसी संदर्भ में, काठमांडू में आयोजित एक दो दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, तकनीकी जानकारों और मीडिया प्रतिनिधियों ने ‘एयरशेड’ मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में यह बात प्रमुखता से उठी कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकारों के समर्थन और जनसहभागिता का होना अनिवार्य है। इंटरनेशनल सेंटर फार इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) द्वारा आयोजित इस बैठक में संस्था के महानिदेशक पेमा ग्याम्त्शो ने कहा कि वायु प्रदूषण के समाधान मौजूद हैं, आवश्यकता है तो बस इस पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित करने और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की। संस्था भूटान और नेपाल के साथ मिलकर एक क्लीन एयर एक्शन प्लान भी तैयार कर रही है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जब वायु प्रदूषण जैसे मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है, तो समाधान प्रक्रिया बाधित होती है। विश्व बैंक के एक सलाहकार ने खुले में शौच मुक्त अभियान की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे अभियानों की सफलता के लिए प्रभावी सरकारी जागरूकता अभियान और जन-मनोरंजन से जुड़े बड़े चेहरों का सहारा लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।
कार्यशाला में ईंट भट्ठों में स्वच्छ तकनीकों के उपयोग के सकारात्मक प्रभावों को भी रेखांकित किया गया, जिसे पाकिस्तान सहित कई अन्य देश भी अपना रहे हैं। हालांकि, बांग्लादेश के प्रतिनिधियों ने नई तकनीक अपनाने में ईंट भट्ठा मालिकों के विरोध और राजनीतिक-आर्थिक बाधाओं को एक बड़ी चुनौती बताया। यह स्पष्ट है कि भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों में भी वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों के बावजूद दिल्ली जैसे शहरों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि सभी देशों को जनभागीदारी के साथ मिलकर इस वैश्विक समस्या का सामना करना होगा।
‘एयरशेड’ एक ऐसा भौगोलिक क्षेत्र है जहां वायु प्रदूषण को समग्र रूप से मापा और प्रबंधित किया जाता है। यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वायु प्रदूषण किसी एक शहर या राज्य की सीमा में नहीं रुकता, बल्कि इसके प्रबंधन के लिए शहरों, राज्यों और पड़ोसी देशों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय आवश्यक है।
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