आगरा कॉलेज में पेड़ कटाई पर एनजीटी का सख्त रुख, रिपोर्ट तलब
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आगरा कॉलेज में चाहरदीवारी निर्माण के लिए पेड़ काटने के मामले में सख्त कदम उठाया है। पीठ ने प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के लिए निर्धारित निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इस मामले में तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।
टीटीजेड में बिना अनुमति के पेड़ काटने पर प्रति पेड़ एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, प्रतिपूरक पौधारोपण के तहत 10 गुना पौधे लगाने और चिह्नित भूमि को संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने की आवश्यकता होती है। एनजीटी के न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की बेंच ने वादी से पेड़ कटाई की तारीख और प्रक्रिया के बारे में पूछताछ की।
यह मामला कॉलेज प्राचार्य द्वारा पेड़ कटवाने और वन विभाग द्वारा कार्रवाई न किए जाने से जुड़ा है। बेंच ने प्राचार्य के अकेले निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाया और प्रबंध समिति की भूमिका पर भी गौर किया। एनजीटी ने प्रभागीय निदेशक को निरीक्षण कर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करते हुए तीन माह में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। यदि वादी वन विभाग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह पुनः याचिका दायर कर सकेगा। इस मामले में एनजीटी का यह कदम पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
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