बढ़ते प्रदूषण के बीच बार-बार आ रही है खांसी तो अपनाएं ये असरदार उपाय | health news
हवा में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण और मौसम में बदलाव के चलते लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। सामान्य दिनों में स्वस्थ रहने वाले लोग भी इन दिनों बार-बार खांसी और सांस से जुड़ी दिक्कतों से परेशान नजर आ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांस के रास्ते सीधे फेफड़ों में पहुंचते हैं, जिससे वहां सूजन और जलन पैदा होती है और खांसी शुरू हो जाती है। यह समस्या कई बार कुछ दिनों में खुद ठीक हो जाती है, लेकिन लगातार बने रहने पर यह गंभीर रूप ले सकती है।
प्रदूषण जनित खांसी से बचाव के प्रमुख उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण के कारण होने वाली खांसी से बचने के लिए सबसे पहले प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय एन-95 मास्क का उपयोग करना बेहद फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि यह धूल के बारीक कणों को श्वसन नली में जाने से रोकता है। इसके अलावा, रोजाना एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की जांच करें और प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर सुबह की सैर या बाहरी गतिविधियों से परहेज करें।
घर के भीतर की हवा को रखें शुद्ध
प्रदूषण केवल बाहर ही नहीं बल्कि खिड़कियों और दरवाजों के जरिए घरों के अंदर भी पहुंच जाता है। इसलिए जब बाहर हवा की गुणवत्ता खराब हो, तो घर की खिड़कियां बंद रखें और संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। घर के अंदर अगरबत्ती जलाने या धूम्रपान करने से बचें, क्योंकि इससे गले और फेफड़ों की सूजन और अधिक बढ़ सकती है।
गले की देखभाल और हाइड्रेशन
गले की खराश और जलन को शांत करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। गुनगुना पानी या हर्बल चाय पीने से गले को काफी राहत मिलती है। वयस्कों और बच्चों के लिए शहद का सेवन भी गुणकारी माना जाता है, हालांकि एक साल से छोटे बच्चों को शहद देने से बचना चाहिए। यदि खांसी के साथ छाती में तेज दर्द, सांस लेने में अत्यधिक परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय रहते बरती गई सावधानी इस मौसमी और पर्यावरणीय संकट से सुरक्षित रहने में मदद करती है।
