पूर्व डीयू प्रोफेसर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, छात्रा से रेप और वीडियो वायरल करने का है आरोप | national news
दिल्ली की एक अदालत ने महिला पूर्व छात्रा के साथ यौन शोषण और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी देने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में नरमी बरतना न्यायहित में नहीं है। यह घटना शैक्षणिक संस्थानों में विश्वास और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर पहलुओं को उजागर करती है, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी और पीड़िता के बीच की वॉट्सऐप चैट से केवल आपसी सहमति का रिश्ता साबित नहीं होता, बल्कि इसमें डराने-धमकाने और दबाव बनाने के साफ संकेत मिलते हैं। जज ने टिप्पणी की कि शिक्षक और छात्र का यह रिश्ता दोनों के बीच ताकत के असंतुलन को दर्शाता है। आरोपी के बाहर रहने पर पीड़िता को प्रभावित करने और डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की पूरी आशंका है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए कड़े कदम जरूरी हैं।
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए और बिना सहमति के आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए। इसके बाद वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर लगातार प्रताड़ित किया गया। वहीं, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे आपसी सहमति का रिश्ता बताया और पुरानी रंजिश के तहत मामला दर्ज कराने की दलील दी।
न्यायालय ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच किसी नामित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही, पुलिस कमिश्नर को पंद्रह दिन के भीतर प्रगति रिपोर्ट मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने को कहा गया है। डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और क्लाउड बैकअप को सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़िता को समय पर न्याय मिल सके।
