चंबल के जंगलों में पाया जाने वाला वन करेला सेहत के लिए बेहद फायदेमंद | agra news
चंबल, उटंगन और यमुना नदी के तटीय इलाकों तथा बीहड़ों की कंटीली झाड़ियों के बीच प्रकृति ने औषधीय गुणों से भरपूर वन करेला प्रदान किया है। बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगने वाला यह खास फल आकार में सामान्य करेले से छोटा होता है लेकिन इसमें कड़वाहट अधिक पाई जाती है। ग्रामीण इसकी अहमियत को भली-भांति समझते हैं और इसे जंगल से बीनकर अपनी पारंपरिक रसोई का हिस्सा बनाते हैं।
स्वाद में कड़वा होने के बावजूद वन करेला पोषक तत्वों का खजाना है। ग्रामीण इसे मसालों के साथ पकाकर चाव से खाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह सब्जी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और भूख को संतुलित करने में असरदार है। इसके अलावा, पारंपरिक रूप से इसका उपयोग रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भी किया जाता रहा है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को राहत मिलती है।
आयुर्वेद में इस वनस्पति को ‘कारवेलक’ नाम दिया गया है, जो कफ और पित्त के असंतुलन को दूर करने में मददगार है। आधुनिक विज्ञान ने भी इसके औषधीय गुणों पर मुहर लगाई है, हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों का सुझाव है कि मधुमेह के मरीजों को दवाइयों के विकल्प के रूप में इसके अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए और डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से ऐसे पारंपरिक और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है ताकि लोग केमिकल युक्त खानपान से दूर रहकर प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रह सकें।
