आगरा किला के हाथी गेट की 22 फीट ऊंची दीवार का होगा संरक्षण | agra news
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत आगरा किला के हाथी गेट के पास स्थित खाई की बाहरी दीवार के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ कर दिया गया है। इस परियोजना पर लगभग 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे आगामी छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐतिहासिक संरचना के इस हिस्से के संवरने से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को किले का मूल मुगलकालीन स्वरूप और अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।
शुरुआती चरण में खाई में जमा मलबा हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके बाद दो अलग-अलग जगहों पर क्रमशः 40 मीटर और 22 मीटर लंबी क्षतिग्रस्त दीवारों को दुरुस्त किया जाएगा। करीब 22 फीट ऊंची इस दीवार की बनावट में इतिहास की कई परतें नजर आती हैं, जिसमें पारंपरिक लाखौरी ईंटों के साथ-साथ पत्थरों के टुकड़े और ब्रिटिशकालीन ईंटों का भी उपयोग देखा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि समय-समय पर इस सुरक्षा दीवार की मरम्मत की जाती रही है।
इतिहास के पन्नों के अनुसार, मुगल काल में आगरा किले की सुरक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत थी और इसके चारों ओर दोहरी खाई बनाई गई थी। बाहरी खाई में पानी भरा रहता था ताकि दुश्मन आसानी से अंदर न आ सकें, जबकि अंदरूनी खाई में हिंसक जानवर रखे जाते थे। किले के चार मुख्य द्वारों में से हाथी गेट और वाटर गेट को ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बंद कर दिया गया था, जबकि वर्तमान में पर्यटकों का प्रवेश केवल अमर सिंह गेट से ही होता है। पुरातत्व विभाग के इस संरक्षण कार्य से न केवल इस प्राचीन धरोहर का जीवनकाल बढ़ेगा, बल्कि पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा।
