बिना तोड़-फोड़ के मिनटों में ऐसे भरें दीवारों की दरारें, जानें आधुनिक तकनीक | technology news
घर की दीवारों और छतों पर समय के साथ दरारें पड़ना एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। यदि इन दरारों को समय रहते ठीक न किया जाए, तो धीरे-धीरे पूरा मकान अंदर से कमजोर होने लगता है और सीलन की समस्या भी पैदा हो जाती है। आधुनिक कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अब ऐसी तकनीकें आ चुकी हैं जिनकी मदद से बिना किसी बड़े तोड़-फोड़ के इन दीवारों को फिर से मजबूत बनाया जा सकता है। ऐसी ही एक बेहद असरदार तकनीक इंजेक्शन ग्राउटिंग (technology news) है, जो मकानों की उम्र बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है।
इंजेक्शन ग्राउटिंग एक ऐसी तकनीकी प्रक्रिया है जिसका मुख्य उपयोग दीवारों, छतों या नींव की दरारों और अंदरूनी खाली जगहों को सुरक्षित तरीके से भरने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए सबसे पहले दरारों के आसपास एक निश्चित दूरी पर छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं। इन छेदों में धातु या एल्युमिनियम के पाइप लगाए जाते हैं और फिर एक विशेष मशीन की मदद से सीमेंट का घोल, एपॉक्सी या पॉलीयूरेथेन यानी पीयू केमिकल हाई प्रेशर के साथ अंदर डाला जाता है।
प्रेशर के कारण यह स्पेशल मटेरियल दरारों के आखिरी कोने तक गहराई से फैल जाता है और सूखने के बाद पूरी तरह ठोस हो जाता है। यदि पानी के रिसाव को रोकने के लिए पॉलीयूरेथेन ग्राउटिंग का इस्तेमाल किया जाए, तो यह केमिकल पानी के संपर्क में आते ही फूलता है और मात्र 10 से 20 मिनट के भीतर लीकेज को रोक देता है। वहीं, एपॉक्सी या सीमेंट ग्राउट को पूरी तरह सख्त होने में 24 से 48 घंटे तक का समय लग सकता है। सही प्रोफेशनल की देखरेख में किया गया यह काम घर को सालों-साल के लिए मजबूत और वाटरप्रूफ बना देता है।
