यूपीआई चार्ज से बचने के लिए वायरल हो रहे पेमेंट स्प्लिट ऐप | technology news
डिजिटल भुगतान की दुनिया में इन दिनों एक नया चलन तेजी से फैल रहा है, जिसके तहत व्यापारी वर्ग संभावित अतिरिक्त शुल्कों से बचने के नए रास्ते तलाश रहा है। आने वाले समय में दो हजार रुपये से अधिक के मर्चेंट भुगतानों पर अतिरिक्त प्रभार लगने की चर्चा के बीच कुछ ऐसे मोबाइल एप्लिकेशन सामने आए हैं जो बड़े भुगतान को छोटे हिस्सों में विभाजित करने का दावा करते हैं [technology news]।
कैसे काम करते हैं ये वायरल ऐप्स
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने इन ऐप्स का इस्तेमाल करना बेहद आसान बताया जाता है। इनमें यूजर को अपनी यूपीआई आईडी और आवश्यक राशि दर्ज करनी होती है। इसके बाद ऐप उस पूरी रकम को दो हजार रुपये से कम के छोटे टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग क्यूआर कोड तैयार कर देता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी को साढ़े चार हजार रुपये का भुगतान लेना है, तो यह ऐप उसे तीन अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर देता है, जिससे प्रत्येक ट्रांजैक्शन की सीमा निर्धारित सीमा के दायरे में बनी रहे।
वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
भले ही ये तकनीकें शुल्क से बचने का आसान जरिया लग रही हों, लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इस तरह के अनधिकृत प्लेटफॉर्म का उपयोग भारी पड़ सकता है। वित्तीय मामलों में गोपनीयता बनाए रखना और किसी भी अनजान सॉफ्टवेयर पर अपनी बैंक डिटेल्स साझा करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे शॉर्टकट अपनाने के बजाय सुरक्षित और आधिकारिक माध्यमों का ही प्रयोग करें, ताकि उनकी गाढ़ी कमाई और निजी डेटा सुरक्षित रह सके।
