उत्तर प्रदेश में 900 नए न्यायालयों के गठन को कैबिनेट की मंजूरी, मुकदमों के बोझ से मिलेगी राहत | up politics news
प्रदेश की न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आम नागरिकों को समय पर न्याय सुलभ कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। जिला अदालतों में मुकदमों के भारी बै बैकलॉग और धीमी गति से चल रही सुनवाई को देखते हुए सरकार ने पहले चरण में 900 नई अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया है। इस पहल से वर्षों से अदालतों के चक्कर काट रहे आम जनमानस को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे न्यायिक व्यवस्था में उनका विश्वास और अधिक मजबूत होगा। (up politics news)
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राष्ट्रीय अदालत प्रबंधन प्रणाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 9,149 नई अदालतों की आवश्यकता जताई थी। इसी कड़ी में पहले चरण के तहत विभिन्न जिलों में 237 अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, 391 सिविल जज सीनियर डिवीजन और 272 सिविल जज जूनियर डिवीजन स्तर के नए कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इन सभी नए न्यायालयों के सुचारू संचालन के लिए कुल 6,656 नियमित और 2,428 आउटसोर्स पदों का सृजन किया जाएगा, जिसमें न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ प्रशासनिक और सहायक स्टाफ भी शामिल होगा।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पहले चरण के क्रियान्वयन पर सालाना करीब 693.60 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, जबकि लगभग 8.72 करोड़ रुपये अनावर्ती व्यय के रूप में प्रस्तावित किए गए हैं। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि नए पदों पर भर्ती की प्रक्रिया मौजूदा रिक्तियों को भरने और आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद ही चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी। इस कदम से न्याय प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और मुकदमों के त्वरित निस्तारण का रास्ता साफ होगा।
