मिट्टी के घर से संसद तक का सफर, जानिए सांसद रवि किशन के संघर्ष की कहानी | bollywood news
रवि किशन का यह प्रेरणादायक सफर उत्तर प्रदेश के जौनपुर और मुंबई की पटरियों से होकर गुजरा है। आर्थिक तंगी के इस दौर में उन्होंने वह समय भी देखा जब घर में बारह सदस्यों के लिए केवल एक ही खिचड़ी बनती थी। बचपन से अभिनय के प्रति उनका झुकाव था और रामलीला में महिला का किरदार निभाने पर उन्हें पिता की मार भी सहनी पड़ी थी। [bollywood news]
मात्र सत्रह साल की उम्र में घर से भागकर मुंबई पहुंचे रवि किशन के पास न तो कोई बड़ा फिल्मी बैकग्राउंड था और न ही आर्थिक संबल। शुरुआती पंद्रह वर्षों तक उन्हें न तो संतोषजनक काम मिला और न ही सम्मानजनक मेहनताना। फिल्म ‘तेरे नाम’ में पंडित रमेश्वर के किरदार ने उनके करियर को एक नई दिशा दी और हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान मजबूत की।
संघर्षों और हजारों बार अपमान का सामना करने के बाद आज रवि किशन सात सौ से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं और वर्तमान में राजनीति में सक्रिय हैं। यह कहानी दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों को भी मात देकर सफलता के शिखर तक पहुंच सकता है।
