मथुरा में बढ़ा agra news जैसा cyber crime, आठ महीने में उड़े 4.91 करोड़ रुपये
मथुरा में साइबर अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा हालिया आंकड़ों से लगाया जा सकता है। जिले में अब पारंपरिक डकैती या लूट के बजाय डिजिटल माध्यमों से ठगी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। चालू वर्ष के शुरुआती आठ महीनों में साइबर ठगों ने आम नागरिकों से लेकर खास लोगों तक को निशाना बनाते हुए करीब 4 करोड़ 91 लाख रुपये साफ कर दिए हैं। इस बढ़ते अपराध ने स्थानीय प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है,
साइबर ठगी के इस नेटवर्क में केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के अधिकारी, बड़े व्यापारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी जालसाजी का शिकार बने हैं। फरवरी और मई के महीनों में करोड़ों रुपये की बड़ी ठगी के मामले सामने आए, जिनमें ठगों ने डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और लुभावने प्रलोभनों का सहारा लिया। यह आंकड़े केवल मथुरा के मुख्य साइबर थाने के हैं, जहां पांच लाख रुपये से अधिक के मामले दर्ज होते हैं। यदि स्थानीय थानों में दर्ज छोटे मामलों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा कई गुना बड़ा हो जाएगा। इस तरह के अपराधों से समाज में आर्थिक सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया है,
बढ़ते मामलों के बीच पुलिस प्रशासन ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से कुछ मामलों में पीड़ितों के पैसे वापस कराने में सफलता मिली है। गोविंद नगर की एक महिला और अन्य पीड़ितों के फंसे हुए पैसे को रिकवर करने के लिए पुलिस लगातार बैंक खातों और फर्जी सिम कार्डों को ब्लॉक करवा रही है। थाना साइबर क्राइम प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि ठगी की घटना होने पर ‘गोल्डन आवर’ यानी शुरुआती समय बेहद अहम होता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराता है, तो रकम वापसी की संभावना काफी बढ़ जाती है,
हालांकि, तकनीकी और कानूनी अड़चनों के कारण फ्रीज हुई रकम को पीड़ितों के खातों में वापस लाने की प्रक्रिया लंबी होती है। ठग विभिन्न राज्यों के खातों से पैसे का हेरफेर करते हैं, जिससे जांच में समय लगता है। भविष्य में इस तरह के धोखे से बचने के लिए प्रशासन ने नागरिकों को कड़ी चेतावनी दी है। किसी भी अज्ञात कॉल, डिजिटल अरेस्ट की धमकी, या व्हाट्सएप पर आने वाले लुभावने निवेश और पार्ट-टाइम जॉब के लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।
