तिग्मांशु धूलिया ने bollywood में कहानी कहने के तौर-तरीकों पर उठाए सवाल
जाने-माने फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया ने हाल ही में हिंदी सिनेमा की दशा और दिशा पर तीखी टिप्पणी की है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में फिल्मों से मौलिक कहानियां गायब होती जा रही हैं, जिसकी मुख्य वजह कॉरपोरेट कल्चर और एक जैसे फिल्मी टेम्पलेट का हावी होना है। यह स्थिति न केवल रचनात्मकता को प्रभावित कर रही है, बल्कि दर्शकों को भी एक ही तरह का कंटेंट देखने पर मजबूर कर रही है।
अपने संबोधन में कमर्शियल सिनेमा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज की कई बड़ी फिल्मों का प्लॉट बेहद साधारण और एक जैसा हो गया है। उन्होंने एक्सट्रीम कैपिटलिज्म को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए समझाया कि जिस तरह आज के दौर में शहरों, खानपान और लाइफस्टाइल में एकरूपता आ गई है, ठीक उसीप्रकार फिल्मों में भी विविधता समाप्त हो रही है। उन्होंने पुराने दौर के फिल्मकारों को याद करते हुए कहा कि साल 2017 तक हिंदी सिनेमा में कहानियों का स्तर और विविधता बेहतर थी, लेकिन उसके बाद अचानक आए बदलाव ने कहानी कहने की कला को पीछे धकेल दिया है।
सिनेमा जगत में इस तरह की बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है जब दर्शक और कलाकार लगातार कंटेंट की गुणवत्ता पर बहस कर रहे हैं। हाल के दिनों में कई अन्य कलाकारों ने भी फिल्मों की पटकथा, राजनीति और हिंसा को लेकर अपनी राय रखी है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर मजबूत स्क्रिप्ट और ओरिजिनल कंटेंट की जरूरत पर बहस छिड़ गई है। जनता के बीच इस बात की चर्चा आम हो गई है कि क्या बड़े बजट और एक्शन से भरपूर फिल्में अच्छे और अर्थपूर्ण संवादों की जगह ले रही हैं।
आने वाले समय में फिल्ममेकर्स के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि वे कॉरपोरेट दबाव से निकलकर दर्शकों को किस तरह की मौलिक और प्रासंगिक कहानियां परोसते हैं। तिग्मांशु धूलिया की आगामी फिल्म ‘घमासान’ इसी साल सितंबर में रिलीज होने वाली है, जो बुंदेलखंड के परिवेश पर आधारित है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी यह फिल्म किस तरह का नया नैरेटिव सेट करती है।
