Agra Digital Arrest Fraud: आगरा में साइबर ठगों ने बुजुर्गों को बनाया निशाना, ठगे लाखों रुपये
आगरा में साइबर ठगों का जाल लगातार फैलता जा रहा है, जहां हाल ही में सामने आए मामलों ने शहर के बुजुर्गों को गहरे सदमे में डाल दिया है। खंदारी क्षेत्र स्थित एक अपार्टमेंट में रहने वाली 72 वर्षीय प्रमोद कुमारी को साइबर अपराधियों ने टेलीकॉम विभाग के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। अपराधियों ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने का डर दिखाकर उनसे दो दिनों में 33 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। इस घटना ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते खतरों को उजागर कर दिया है, जिससे आम जनता में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
प्रशासन और साइबर सेल के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधियों का मनोवैज्ञानिक तरीका बेहद शातिर होता है। ठगों की कार्यशैली पर नजर डालें तो कॉल रिसीव करने के शुरुआती 20 सेकंड बेहद अहम होते हैं। इस दौरान अपराधी सामने वाले की आवाज और प्रतिक्रिया से उसकी मानसिक स्थिति भांप लेते हैं। यदि व्यक्ति घबरा जाता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाया जाता है, वहीं यदि वह शांत रहता है, तो उसे भारी मुनाफे का लालच देकर क्रिप्टो या अन्य स्कीमों में निवेश के नाम पर लूटा जाता है।
एक अन्य सनसनीखेज मामले में ताजगंज इलाके के फतेहाबाद रोड स्थित एक अपार्टमेंट में रहने वाले राकेश शर्मा को विदेशी क्रिप्टो में निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा दिया गया। फर्जी ऐप के जरिए उन्हें मुनाफे का लालच देकर 16 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। इस भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव के कारण बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई। उनके बेटे ने बैंक खातों की जांच के बाद साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाली धमकी भरी या अत्यधिक मुनाफे वाली कॉल्स पर तुरंत भरोसा न करें। इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए नागरिकों को जागरूक होने की सख्त आवश्यकता है, ताकि वे अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रख सकें। पुलिस ऐसे गिरोहों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है और अपराधियों की धरपकड़ जारी है।
