Lucknow news में जिंदा लौटी शिवानी, दो साल पहले परिवार ने कर दिया था गलत शव का अंतिम संस्कार
राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और शव शिनाख्त की प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दो साल पहले जिस बेटी को मृत मानकर परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, उसके अचानक जिंदा लौटने से हर कोई हैरान है। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस और प्रशासन की लापरवाही किस हद तक आम आदमी के जीवन पर भारी पड़ सकती है।
घटना की पृष्ठभूमि वर्ष 2024 की है जब नवीकोट नंदना निवासी शिवानी अचानक लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसी दौरान सैरपुर थाना क्षेत्र में एक नाले से अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ था। पुलिस की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने हाथ के कलावे और अंगूठी के आधार पर शव की शिनाख्त शिवानी के रूप में कर ली थी। हालांकि पुलिस ने डीएनए सैंपल भी लिया था, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही भावनाओं में बहकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया। अब दो साल बाद 5 सितंबर को शिवानी के अचानक घर लौटने से इलाके में सनसनी फैल गई है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि मृतका शिवानी नहीं थी, तो वह महिला कौन थी जिसका अंतिम संस्कार परिवार ने कर दिया और पुलिस ने उसे बंद कर दिया। मृतका की पहचान सुनिश्चित करने में पुलिस और फॉरेंसिक टीम की यह बड़ी चूक मानी जा रही है। इस प्रकार की लापरवाही से असली अपराधी या पीड़ित परिवार न्याय से वंचित हो सकते हैं, जिसका सीधा असर समाज की न्याय व्यवस्था पर पड़ता है।
अब स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ पुलिस यह जांच कर रही है कि शिवानी पिछले दो वर्षों तक कहां और किस परिस्थिति में रही, वहीं दूसरी तरफ उस अज्ञात महिला की पहचान तलाशने की कवायਦ फिर से शुरू कर दी गई है जिसका शव नाले से बरामद हुआ था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट और नए बयानों के आधार पर मामले की सच्चाई का जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
