तापसी पन्नू की नई फिल्म गंधारी रिलीज, जानिए कैसी है bollywood मूवी की कहानी और एक्टिंग
एक मां की बेटी गायब हो जाए तो उसका दर्द कितना गहरा होता है, इसे पर्दे पर उतारने के इरादे से देवाशीष मखीजा ने अपनी नई फिल्म ‘गांधारी’ दर्शकों के सामने पेश की है। यह कहानी मुख्य रूप से एक मां, उसकी गायब बेटी और उसे वापस पाने के लिए किए जाने वाले संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है। इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे एक साधारण पारिवारिक आपदा व्यवस्था और समाज की परतों को चीरकर सामने आती है।
बानी यानी तापसी पन्नू और उनके पति गोकुल यानी इश्वाक सिंह अपनी बेटी के साथ एक सफर पर निकलते हैं, जहां अचानक उनकी बेटी गायब हो जाती है। तलाश करते हुए वे जॉयपुरा नामक एक छोटे शहर पहुंचते हैं, जहां बानी को पता चलता है कि मामला केवल एक बच्चे के अपहरण का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा और खतरनाक नेटवर्क काम कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस संघर्ष के दौरान बानी अपनी आंखों की रोशनी खो बैठती है, लेकिन वह अपनी इस कमजोरी को अपनी ताकत बनाती है और आरोपियों तक पहुंचने के लिए खुद को अंधा होने का नाटक करती है।
फिल्म में तापसी पन्नू ने बानी के किरदार को जीवंत करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। उन्होंने एक्शन दृश्यों से लेकर भावनात्मक पलों तक में पूरी ईमानदारी दिखाई है। उनके अलावा मीता वशिष्ठ, छाया कदम, जतिन सरना और चंदन रॉय जैसे मंझे हुए कलाकार भी स्क्रीन पर मौजूद हैं। हालांकि, समस्या यह है कि निर्देशक ने कहानी में इतने सारे ट्विस्ट और टर्न भर दिए हैं कि दर्शक उलझन में पड़ने लगते हैं। बाल तस्करी, पुलिस की भूमिका और धार्मिक प्रतीकों को एक साथ पिरोने की कोशिश में पटकथा बोझिल हो जाती है।
कुल मिलाकर, ‘गांधारी’ एक ऐसी फिल्म है जो मजबूत अभिनय और बेहतरीन इरादों के बावजूद अपनी जटिल पटकथा के कारण कमजोर पड़ जाती है। यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि सिनेमा में संदेश और मनोरंजन का संतुलन कितना जरूरी है। यदि आप थ्रिलर और इमोशनल ड्रामा के शौकीन हैं, तो यह फिल्म एक बार देखने लायक है, बशर्ते आप इसके लंबे और उलझे हुए सफर को सहन करने के लिए तैयार हों।
