टोल स्कैम में ED की बड़ी कार्रवाई, 14 ठिकानों पर छापा, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स की वसूली में हो रहे बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। एनएचएआई (NHAI) टोल प्लाजा पर फर्जी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये के हेरफेर के मामले में ईडी ने उत्तर प्रदेश सहित देश के 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई से टोल कलेक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में हड़कंप मचा हुआ है।
यह छापेमारी लखनऊ जोनल ऑफिस द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की जा रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और कोलकाता में ईडी की टीमों ने टोल ठेकेदारों के आवास, निजी दफ्तरों और टोल मैनेजमेंट कंपनियों के परिसरों को खंगाला।
जांच में चौंकाने वाली कार्यप्रणाली सामने आई है। पता चला है कि एनएचएआई के टोल प्लाजा पर तैनात कुछ निजी एजेंसियों और सिंडिकेट ने मिलकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन तैयार किया था, जिससे चालकों को नकली टोल रसीदें दी जाती थीं और वसूली गई रकम राष्ट्रीय एनएचएआई के सिस्टम में दर्ज ही नहीं होती थी। इस तरह रोजाना लाखों रुपये का टोल कलेक्शन सीधे निजी खातों में जा रहा था।
एनएचएआई के डेटा विश्लेषण और तकनीकी विशेषज्ञों ने फॉरेंसिक जांच के दौरान इस सॉफ्टवेयर का पता लगाया, जो सिस्टम में समानांतर रूप से फर्जी एंट्रीज कर रहा था। ईडी की टीमें मौके पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, सर्वर डेटा, हार्ड डिस्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं। आशंका है कि इस फर्जीवाड़े के तार कई बड़े प्रशासनिक अधिकारियों और सफेदपोशों से भी जुड़े हो सकते हैं। ईडी का अनुमान है कि यह घोटाला कई करोड़ रुपये का है और छापेमारी के बाद कई बड़ी गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
इस तरह के घोटाले का एक मामला पिछले साल यूपी के मिर्जापुर में भी सामने आया था, जहां अतरैला टोल प्लाजा से 120 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ था। उस मामले में भी टोल प्लाजा पर सॉफ्टवेयर की मदद से गबन किया जा रहा था।
इस फर्जीवाड़े में बिना फास्ट टैग वाली गाड़ियों या फास्ट टैग अकाउंट में कम पैसे वाली गाड़ियों से दोगुना टोल वसूला जाता था। फर्जी रसीदें देकर यह अतिरिक्त राशि कर्मचारियों द्वारा आपस में बांट ली जाती थी, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा था। इस पूरे मामले से आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि यह सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित धन को प्रभावित करता है।
