साइबर ठगों का नया ‘डिजिटल अरेस्ट’ जाल: हर दिन 20 लोग बन रहे शिकार, ऐसे बचें
अलीगढ़ में साइबर ठगी का जाल लगातार फैलता जा रहा है, जिससे हर दिन औसतन 20 लोग मूर्ख बनकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। साइबर ठग अब नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं, जिनमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक प्रमुख है। इस तरीके में ठग लोगों को अवैध गतिविधियों में संलिप्तता का डर दिखाकर केस रफा-दफा करने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं, जबकि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज मौजूद नहीं है।
साइबर सेल के गठन के बाद से मामलों में तेजी आई है, खासकर कोरोना काल के बाद। वर्तमान में रोजाना 20 से अधिक शिकायतें आ रही हैं। पिछले साल हुई कुल 18.48 करोड़ रुपये की ठगी में पुलिस ने 6.73 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए थे। इस साल भी ठगी के बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस सक्रियता से रिकवरी का प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने पर रुपये वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
साइबर क्राइम थाने में पांच लाख रुपये से अधिक की ठगी के मुकदमे दर्ज होते हैं, लेकिन बढ़ते मामलों को देखते हुए अब एक लाख रुपये से अधिक के मामले भी दर्ज किए जा रहे हैं। 50 हजार से एक लाख तक के मामले संबंधित थानों में और 50 हजार से कम की शिकायतों को साइबर सेल में दर्ज कर रिकवरी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फोन किया जा सकता है या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा, संबंधित थाने या साइबर सेल में व्यक्तिगत रूप से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शहर में एक नए, बड़े साइबर थाने का निर्माण भी जल्द शुरू होगा।
ठगों की मॉडस ऑपरेंडी में एटीएम कार्ड नंबर और ओटीपी पूछना, व्हाट्सएप वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल करना, और अब डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीके शामिल हैं। वे लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर भी ठगी को अंजाम देते हैं।
साइबर ठगी से बचने के लिए अनजान नंबरों से आने वाली कॉलों पर कोई जानकारी साझा न करें, किसी भी ऐप को डाउनलोड करने या एक्सेस देने से पहले सतर्क रहें, और सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या ऑफर के झांसे में न आएं।
