उद्योग बंधु बैठक में लापरवाही: बिजली विभाग के एक्सईएन को चार्जशीट जारी करने के निर्देश
राजधानी के औद्योगिक विकास की राह में ढीली कार्यशैली बाधा बन रही है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय ‘उद्योग बंधु’ की बैठक में लापरवाही देखकर जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। लगातार दूसरी बैठक में भी संतोषजनक प्रगति न पाए जाने पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और चार्जशीट जारी करने के निर्देश दिए हैं। पिछली बैठक में संतोषजनक जवाब न मिलने पर एक सप्ताह पहले ही उनको कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। बैठक के दौरान अमौसी और नादरगंज औद्योगिक क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं (बुनियादी ढांचे) की समीक्षा की गई।
यूपीसीडा के अधिशासी अभियंता ने बताया कि क्षेत्र में नाला, कलवर्ट और मीडियन निर्माण का कार्य चल रहा है। इस पर जिलाधिकारी विशाख जी ने दो टूक शब्दों में कहा कि पिछली बैठकों के निर्देशों का पूर्ण पालन नहीं हुआ है। उन्होंने 31 मार्च तक हर हाल में सभी निर्माण कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा तय की। गोयला औद्योगिक क्षेत्र में एलटी लाइन (बिजली आपूर्ति) उपलब्ध कराने की प्रगति बेहद खराब पाई गई। स्वीकृत बजट होने के बावजूद कार्य की गति संतोषजनक न मिलने पर डीएम ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। पिछली बैठक में भी बिजली विभाग के एक्सईएन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए थे। हाल ही में उनको उपायुक्त उद्योग ने डीएम के निर्देश पर नोटिस भेजा था। ऐसे में डीएम ने आज बैठक में संबंधित अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के विरुद्ध चार्जशीट जारी कर उसकी प्रति प्रबंध निदेशक, विद्युत विभाग को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को निर्बाध बिजली देना प्राथमिकता है और इसमें कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से धनराशि के अभाव में यहाँ विकास कार्य रुके हुए थे। बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार से मिलने वाली आवश्यक धनराशि अब प्राप्त हो गई है, जिससे रुके हुए प्रोजेक्ट्स अब दोबारा शुरू होंगे। डीएम ने निर्देश दिए कि फंड मिलने के बाद अब काम में कोई देरी नहीं होनी चाहिए।
बैठक के प्रारंभ में ‘निवेश मित्र’ पोर्टल पर लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा की गई। डीएम ने पाया कि कई विभागों में फाइलें समय-सीमा से अधिक समय से अटकी हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोर्टल पर प्रदर्शित हर प्रकरण का निस्तारण निर्धारित समय के भीतर होना अनिवार्य है। देरी होने पर संबंधित विभाग के अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। इस ढीले रवैये का सीधा असर औद्योगिक विकास पर पड़ रहा है, जिससे उद्यमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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