नेपाल की बहू को नौ साल बाद भी वोटिंग का हक नहीं, एसआईआर ने उठाया सवाल
नेपाल के कंचनपुर की रहने वाली पूजा की शादी नौ साल पहले पीलीभीत के महेंद्र सिंह से हुई थी। भारत में बसने के बाद भी, उन्हें अभी तक वोटर के रूप में पंजीकृत नहीं किया गया है, जिससे उनके नागरिक अधिकारों पर सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एसआईआर ने इस मुद्दे को उठाया है और अधिकारियों से मामले की जांच कर महिला को उसके अधिकार दिलाने की मांग की है।
समस्या तब खड़ी हुई जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए फॉर्म भरते समय, वर्ष 2003 की मतदाता सूची के अनुसार उनकी या उनके अभिभावक की एपिक आईडी (मतदाता पहचान पत्र क्रमांक) मांगी गई। चूँकि पूजा उस समय नेपाल में थीं और उनके पिता भी वहीं के निवासी हैं, इसलिए उनके पास उस वर्ष का कोई भारतीय मतदाता सूची रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
जिला प्रशासन ने इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि ऐसे मामलों में, आवेदक का अधूरा फॉर्म भी स्वीकार किया जाएगा। बाद में, नोटिस भेजकर फॉर्म अधूरा होने का कारण पूछा जाएगा। जवाब के साथ, उन्हें अपने विवाह और नागरिकता प्रमाण पत्र जमा करने होंगे। इसके बाद, एसआईआर के दूसरे चरण में उनका नाम नए सिरे से मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। यदि अन्य नेपाली बहुओं को भी ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें भी इसी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
पीलीभीत जिले की सीमा से सटे महाराजपुर, बूंदीभूड़, टाटरगंज, कंबोजनगर, बाजारघाट, बैल्हा जैसे दर्जनों गांवों में नेपाल की चार दर्जन से अधिक लड़कियां भारतीय युवकों से शादी कर बस गई हैं। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान इन सभी के सामने मतदाता पंजीकरण को लेकर ऐसी ही जटिलताएं आ रही हैं।
जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक 73.44 प्रतिशत फार्म जमा हो चुके हैं और 79.62 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है। इसमें 73.44 प्रतिशत डेटा डिजिटाइज्ड किया जा चुका है। इस दौरान 10,78,159 मतदाताओं का डेटा डिजिटाइज्ड हुआ और 90,780 मतदाता एएसडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, या दोहरी प्रविष्टि) पाए गए।
