मढाहबीवपुर में बंदरों का आतंक, ग्रामीणों ने वन विभाग से की पकड़वाने की मांग
मढाहबीवपुर गांव में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। बंदरों के हमलों में कई लोग घायल हो चुके हैं, जिससे उनमें भय का माहौल है। हाल ही में, प्रकाश शर्मा अपने घर पर काम कर रहे थे, तभी बंदरों ने उन पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया।
इसी तरह, कुछ दिन पहले गिरप्रसाद शर्मा की पत्नी पर भी बंदरों ने हमला किया। इस हमले में वह गिर गईं और उनके कूल्हे में गंभीर चोटें आईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। इन घटनाओं के अलावा, भोलू की पत्नी, होराम की पत्नी और नीरा देवी भी बंदरों के हमलों का शिकार हो चुकी हैं। इन घटनाओं ने महिलाओं में बंदरों के प्रति गहरा डर पैदा कर दिया है।
किसानों के लिए भी बंदरों का आतंक एक बड़ी समस्या बन गया है। किसान अपनी फसलों को बंदरों से बचाने के लिए अतिरिक्त उपाय करने को मजबूर हैं। यतेंद्र भूषण उर्फ राजा जैसे किसानों ने कपड़े सुखाने के लिए एक अलग कमरे की व्यवस्था की है, ताकि बंदर उन्हें फाड़ न सकें। गेहूं जैसी फसलें सुखाने के लिए भी एक अलग हाल बनाया गया है। हालांकि, कई किसान ऐसे हैं जो संसाधनों की कमी के कारण बंदरों के आतंक को झेलने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि वन विभाग जल्द से जल्द इन बंदरों को पकड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ दे। पिसावा के निवासी भी बंदरों के इस आतंक से त्रस्त हैं। वन विभाग के कर्मचारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। इस समस्या का समाधान न होने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
