मोहन भागवत का बड़ा बयान: भारत हिन्दू राष्ट्र, सभी हिन्दुओं के लिए खुले हों मंदिर – RSS news
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लखनऊ में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ‘भारत को हिन्दू राष्ट्र’ बताया और सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उनके इस बयान का राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि यह संघ की विचारधारा और देश में सामाजिक एकता पर उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि सभी हिन्दू एक-दूसरे के सहोदर हैं और समाज में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
भागवत ने मंगलवार शाम निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में ‘कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर, कुएं और श्मशान सभी हिन्दुओं के लिए खुले होने चाहिए, और उनमें किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने संघ कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे समाज के उन वर्गों के निकट जाएं जो अभी संघ से नहीं जुड़े हैं और उनके साथ आत्मीय संबंध स्थापित करें। उनका मानना था कि ये संबंध चौराहे से शुरू होकर परिवार तक विस्तृत होने चाहिए, क्योंकि ‘सब अपने हैं’ की भावना से ही व्यवहार करना चाहिए। यह बयान देश में सामाजिक एकता और धार्मिक स्थलों तक पहुंच सुनिश्चित करने के संघ के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
मोहन भागवत ने बच्चों की शिक्षा और करियर को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि करियर केवल पेट भरना, ज्यादा कमाना या उपभोग करना नहीं है, बल्कि यह कमाने से ज्यादा बांटने में है। उन्होंने अभिभावकों से ऐसी शिक्षा देने का आग्रह किया जिससे बच्चे अमीर होकर दान दें और दूसरों के लिए जीना सीखें। घरों में ऐसे संस्कार देने की आवश्यकता है जिससे बच्चे यह समझें कि उनका हित देश के साथ जुड़ा है और ‘मेरा देश ही पहले है’। उन्होंने विद्या और धन को देश के लिए कमाने पर जोर दिया।
सामाजिक समरसता को लेकर भागवत ने कहा कि यह केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर प्रयासों से आएगी। संघ पूरे हिन्दू समाज को एक मानता है और इसलिए आपसी मेलजोल बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि संघ के कुटुम्ब में जात-पात का कोई स्थान नहीं है और ऐसा ही समाज में भी होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संघ को पुस्तकों से पढ़ने की बजाय स्वयंसेवकों को देखकर अधिक समझा जा सकता है।
भागवत ने परिवार को समाज की इकाई बताया और कहा कि सामाजिक व्यवहार का परीक्षण परिवार में होता है। उन्होंने बचत की आदत, मातृभाषा के महत्व, देशभक्ति, प्रामाणिकता, अनुशासन और कुटुम्ब गौरव जैसे मूल्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक के अनुशासित उपयोग की वकालत करते हुए कहा कि हमें यह निर्धारित करना चाहिए कि कितने समय तक क्या देखना है, क्योंकि विज्ञान भी एआई, टीवी, मोबाइल और फिल्मों की हानियां बताता है। नई पीढ़ी को इन बातों से अवगत कराना चाहिए।
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