मुजफ्फरपुर में ठगी का जाल: 500 लोग शिकार, चिट फंड ऑफिस सील होगा
मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के कोल्हुआ पैगंबरपुर इलाके में संचालित एक चिट फंड कंपनी द्वारा किए गए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस कंपनी ने कथित तौर पर करीब 500 लोगों को नौकरी का झांसा देकर ठगा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और अब मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कंपनी के दफ्तर को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, एसडीपीओ टू विनीता सिन्हा ने बताया कि मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है और मंगलवार को कार्यालय को सील कर दिया जाएगा। पुलिस फरार चल रहे मकान मालिक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। जांच अधिकारी ने पीड़ित युवकों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं। पीड़ितों में न केवल बिहार के बल्कि नेपाल, दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी के युवक भी शामिल हैं, जो नौकरी की तलाश में यहाँ आए थे।
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर नौकरी के विज्ञापन के माध्यम से इस कंपनी के बारे में पता चला। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर उन्हें कार्यालय आने को कहा गया। वहां पहुंचने पर अधिक वेतन पर नौकरी दिलाने का वादा किया गया। इसके लिए पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर 12 हजार रुपये लिए गए। इसके बाद, उन्हें विभिन्न कार्यों के लिए ट्रेनिंग दी गई और कागजात बनाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 25-25 हजार रुपये वसूले गए। अंत में, नौकरी ज्वाइन कराने से पहले दो-दो लाख रुपये जमा कराए गए। जब ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने नौकरी के बारे में पूछा तो कंपनी के लोग भड़क गए और उन्हें भगा दिया।
थानाध्यक्ष रोहन कुमार के अनुसार, नेपाल के रंजीत कापड़ की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि फर्जी कार्यालय खोलकर युवकों से नौकरी के नाम पर ठगी की जा रही थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नेपाल के काबे जिले के सुजन दुनगाना, दैलेख जिले के हेमराज मल्ला, तल्हू जिला के यशराम तमांड और चंद्रवती पोखरी थाने के भरत अधिकारी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद सभी को जेल भेज दिया गया है। मकान मालिक की तलाश जारी है, क्योंकि पीड़ितों का दावा है कि वह भी इस गिरोह का अहम हिस्सा है।
पीड़ितों में शामिल नेपाल के मोहतरी जिले के रंजीत कापड़ ने बताया कि अधिक रुपये के लालच में वह गार्ड की नौकरी के लिए यहां आए थे। उन्हें 25 से 30 हजार रुपये महीने का वेतन बताया गया था। रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें अपने साथ चार और लोगों को कंपनी में जोड़ने को कहा गया था, जिसके बाद उन्हें क्षमतानुसार नौकरी मिलेगी। इसी लालच में उन्होंने कुछ और बेरोजगार युवकों को लाकर कंपनी में रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन नौकरी नहीं मिली और जमा किए गए पैसे भी वापस नहीं हुए। फिलहाल, नेपाल, दार्जिलिंग व सिलीगुड़ी समेत अन्य राज्यों के आधा दर्जन युवक तीन दिनों से थाने के आसपास रुके हुए हैं, अपने ठगे गए रुपयों की वापसी की उम्मीद में।
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