बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में छात्र संवाद: रिजल्ट व डिग्री की समस्या बनी सिरदर्द
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में सोमवार को आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम में छात्रों ने रिजल्ट और डिग्री न मिलने को लेकर अपनी समस्याओं का अंबार लगा दिया। कई छात्रों ने बताया कि बार-बार विश्वविद्यालय में आवेदन करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, जिससे उनमें काफी निराशा है। प्राक्टर प्रो. विनय शंकर राय की अध्यक्षता में आयोजित इस संवाद में विद्यार्थियों ने अपनी व्यथा सुनाई।
एमडीडीएम की छात्रा मौसमी, जो स्नातक सत्र 2020-23 की छात्रा हैं, ने बताया कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी उन्हें अब तक अंकपत्र प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय का चक्कर लगाया, लेकिन उन्हें उनका प्रमाणपत्र नहीं मिल सका। यह स्थिति दर्शाती है कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक प्रक्रिया में कहीं न कहीं खामी है, जो छात्रों को परेशान कर रही है।
छात्र संवाद में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या अधिक थी जो अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूसरी या तीसरी बार आए थे। एक छात्र ने हताशा जताते हुए कहा कि उनकी केवल शिकायतें सुनी जा रही हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) प्रो. आलोक प्रताप सिंह भी इस संवाद में उपस्थित थे।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि छात्र संवाद में आ रही शिकायतों का त्वरित निष्पादन किया जाएगा। छात्रों की मुख्य समस्याएं पेंडिंग रिजल्ट, अंकपत्र न मिलना और दस्तावेजों में त्रुटियों से संबंधित थीं। इसी क्रम में, छात्रा सोनाली कुमारी, जिसे अंकपत्र नहीं मिला था, उसकी समस्या का समाधान मौके पर ही आईटी सेल द्वारा किया गया। बकुची कॉलेज के एक छात्र और एलएस कॉलेज की अमिशा कुमारी ने बताया कि उनका रिजल्ट अभी भी पेंडिंग है, जिसके लिए उन्होंने दो हफ्ते पहले आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है।
एक अन्य छात्र सोनू कुमार ने पोर्टल पर उसके पूरे रिजल्ट में अंकों के न होने की समस्या बताई। अहमद रजा ने डेढ़ वर्ष से विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने की बात कही। पहले उसके नाम की स्पेलिंग में गलती थी, जिसे ठीक कराने के बाद अब रजिस्ट्रेशन नंबर में गड़बड़ी आ गई है। यह दिखाता है कि विश्वविद्यालय की प्रणाली में बार-बार त्रुटियां हो रही हैं, जिससे छात्रों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस बीच, विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर (पीजी) सत्र 2024-26 के सेकेंड सेमेस्टर की परीक्षाएं भी सोमवार से शुरू हो गई हैं। ये परीक्षाएं नए व पुराने परीक्षा भवनों में आयोजित की जा रही हैं और एक महीने तक चलेंगी। इसके बाद प्रायोगिक और मौखिक परीक्षाएं जनवरी के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। हालांकि, पीजी छात्रों को परीक्षा पैटर्न में बदलाव न होने से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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