मेरठ देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर, AQI 411 पार: गाजियाबाद पहले स्थान पर
मेरठ में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। शुक्रवार को शहर देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया, जहाँ शाम चार बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 411 दर्ज किया गया। यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि शीर्ष तीन सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ के पड़ोसी शहर भी शामिल हैं।nnकेंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद 422 AQI के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि हापुड़ 406 AQI के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक गुरुवार शाम पांच बजे से शुक्रवार शाम चार बजे तक के औसत को दर्शाता है।nnप्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। सड़कों पर उड़ने वाली धूल, खुले में जलाया जा रहा कूड़ा, पुराने और खटारा वाहनों से निकलने वाला धुआं, और फैक्ट्रियों से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक गैसें प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त, मौसम की परिस्थितियाँ भी प्रदूषण को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, लेकिन इस वर्ष कड़ाके की ठंड न पड़ने के बावजूद प्रदूषण बेलगाम हो गया है।nnविशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषित कणों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए हवा के वेंटिलेशन इंडेक्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सामान्य परिस्थितियों में, कणों को जमने से रोकने के लिए यह इंडेक्स 6000 वर्गमीटर प्रति सेकेंड से अधिक होना चाहिए। हालांकि, दिल्ली और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को यह इंडेक्स मात्र 2850 वर्गमीटर प्रति सेकेंड था, जो कणों के स्थायित्व को दर्शाता है।nnकेंद्रीय गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के नियमों, जैसे निर्माण सामग्री को ढकना, बड़े निर्माण कार्यों पर रोक और खटारा वाहनों पर प्रतिबंध, का पालन न होना स्थिति को और गंभीर बना रहा है। कुछ स्थानों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।nnमौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार की संभावना है, लेकिन अगले दो दिनों तक यह मानक से काफी नीचे रहने की आशंका है। रात में नमी की उच्च मात्रा (93 प्रतिशत) के कारण दूषित गैसों और पीएम 2.5 व 10 की मात्रा अत्यधिक बढ़ रही है। कार्बन मोनोऑक्साइड की सांद्रता, जो दोपहर में 20 तक थी, रात 115 तक पहुंच गई।nnकृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. यूपी शाही के अनुसार, किसी भी मौसमीय सिस्टम के सक्रिय न होने के कारण हवा स्थिर बनी हुई है, जिससे प्रदूषित कण निचले वायुमंडल में जमा हो रहे हैं। आगामी दिनों में रात के तापमान में गिरावट की आशंका है, जो प्रदूषण को और बढ़ा सकती है।”
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