मदन सहनी चौथी बार मंत्री, मिथिलांचल में अति पिछड़ा वर्ग को मिली नई राजनीतिक दिशा
बिहार की राजनीति में दरभंगा के बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक मदन सहनी के चौथी बार मंत्री बनने से मिथिलांचल क्षेत्र में अति पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक समीकरणों को एक नई दिशा मिली है। इस नियुक्ति को एनडीए सरकार द्वारा अति पिछड़ा वर्ग का समर्थन मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मदन सहनी की सादगी, विनम्र व्यवहार और अति पिछड़ा वर्ग के प्रति समर्पण ने उन्हें मिथिलांचल में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया है। उनके अब तक के कार्यकाल में उन पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप न लगना भी उनकी छवि को और मजबूत करता है। यह नियुक्ति न केवल अति पिछड़ा वर्ग को साधने का प्रयास है, बल्कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता को भी दर्शाती है।
मदन सहनी का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा है। खराजपुर गांव निवासी किसान बिंदेश्वर सहनी के पुत्र मदन सहनी ने अपनी प्रारंभिक से लेकर स्नातक तक की शिक्षा दरभंगा से पूरी की। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय होने के बाद उन्होंने पंचायत चुनाव में जिला परिषद सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे दरभंगा जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे।
शुरुआत में राजद से जुड़े रहने के बावजूद, टिकट न मिलने पर उन्होंने जदयू का दामन थामा और 2010 में बहादुरपुर से पहली बार विधानसभा पहुंचे। 2015 में गौड़ाबौराम से विधायक बनने के बाद वे खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री बने। 2020 में उन्होंने अपने गृह विधानसभा क्षेत्र बहादुरपुर से आरके चौधरी को हराकर जीत दर्ज की और समाज कल्याण मंत्री बने। हालिया चुनाव में उन्होंने राजद के वरिष्ठ नेता भोला यादव को हराकर अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें एक बार फिर मंत्री पद से नवाजा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मदन सहनी जैसे अति पिछड़ा वर्ग के नेता को मंत्री बनाना आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भी एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। गरीब और अति पिछड़ा वर्ग को अपने पाले में लाने की यह रणनीति मिथिलांचल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में एनडीए को मजबूत समर्थन दिला सकती है।
