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तेंदुए की खाल तस्करी: Wildlife SOS पर लगे गंभीर आरोप, MP STSF कर रही जांच

By Aug 18, 2026

मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) द्वारा की जा रही जांच में वाइल्डलाइफ एसओएस संस्था पर तेंदुए की खाल की तस्करी के मामले में गंभीर आरोप लगे हैं। हाल ही में आगरा के सैंया से चार तस्करों को तेंदुए की 10 खालों के साथ गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों ने पूछताछ के दौरान वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिया है।

यह घटनाक्रम इस ओर इशारा कर रहा है कि क्या संस्था ने अपनी छवि चमकाने या धन जुटाने के उद्देश्य से शिकार का आयोजन कर जब्त की गई खालों का ‘नाटक’ किया था। वाइल्डलाइफ एसओएस ने इन आरोपों को पूरी तरह से गलत बताते हुए कहा है कि वे वन विभाग को हर संभव सहयोग कर रहे हैं।

23 जुलाई को ग्वालियर-आगरा हाईवे पर एक होटल से चार लोगों को तेंदुए की खालों के साथ पकड़ा गया था। उस समय वाइल्डलाइफ एसओएस ने अपनी फारेस्ट वाच एंटी-पोचिंग यूनिट की महीनों की निगरानी का दावा किया था। चूंकि खालें मध्य प्रदेश से जुड़ी थीं, इसलिए एसटीएसएफ ने भी अपनी जांच शुरू की।

जांच के दौरान शिवपुरी और मुरैना के जंगलों में तेंदुओं के अवशेष मिले, जिन्हें डीएनए जांच के लिए देहरादून भेजा गया है। इस मामले में भगवान सिंह उर्फ सलीम और उनके सहयोगी वसीम को गिरफ्तार किया गया है। हिरासत में लिए गए बयानों के अनुसार, उन्होंने सीईओ कार्तिक सत्यनारायण के निर्देश पर काम करने की बात कही है।

एसटीएसएफ ने सीईओ सत्यनारायण को 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का नोटिस जारी किया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जो इस ऑपरेशन को निजी लाभ से जोड़ते हैं। मध्य प्रदेश की मुख्य वन्यजीव संरक्षक समीता राजौरा ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार आरोपियों ने वाइल्डलाइफ एसओएस के पेरोल पर होने का दावा किया है।

इस मामले से आम जनता पर वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। क्या जिन संस्थाओं पर वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही अवैध व्यापार में लिप्त हो सकती हैं? यह सवाल आम लोगों के मन में उठ रहा है। डीएफओ राजेश कुमार ने भी कहा है कि एसटीएसएफ को वाइल्डलाइफ एसओएस के खिलाफ कुछ साक्ष्य मिले हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस ने 17 अगस्त को जारी एक बयान में सभी आरोपों को खारिज किया और कहा कि संस्था कानून और न्याय का पालन करती है, तथा सीईओ कार्तिक सत्यनारायण को न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।

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