दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर की अंतिम इच्छा और उनके जीवन से जुड़े अनछुए पहलू | entertainment news
भारतीय सिनेमा जगत ने अपने एक ऐसे अनमोल नगीने को खो दिया है, जिन्होंने अपनी बेबाक अदाकारी और संजीदा अभिनय से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। नाना पाटेकर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह सिनेमा के एक युग थे, जिनकी आवाज और अंदाज का हर कोई कायल था। उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसा खालीपन आ गया है जिसे भरना नामुमकिन है।
अपने जीवनकाल में ही उन्होंने अपनी मृत्यु और अंतिम संस्कार को लेकर बेहद स्पष्ट विचार रखे थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साझा किया था कि वह अपनी जिंदगी पूरी सादगी से जीते आए हैं और मौत एक अटल सत्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा जताते हुए विशेष रूप से कहा था कि उनके अंतिम संस्कार में गीली लकड़ियों का प्रयोग बिल्कुल न किया जाए। इसके पीछे उनका तर्क था कि गीली लकड़ी के धुएं से वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ जाएंगे, और वह नहीं चाहते कि उनकी विदाई पर कोई भी दुखी हो या रोए।
परिंदा, तिरंगा, क्रांतिवीर, और वेलकम जैसी अनगिनत फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले नाना पाटेकर ने हर तरह के किरदारों में जान फूंकी। खलनायक की भूमिका हो या फिर कॉमेडी और गंभीर किरदार, उन्होंने हर जॉनर में अपनी अद्भुत छाप छोड़ी। उनके परिवार में माता-पिता, भाई और बहनों के निधन के बाद वह अकेले रह गए थे, और उनका मानना था कि उनकी यह विदाई उन्हें उनके बिछड़े हुए अपनों के पास ले जाएगी।
उनके निधन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनका अंतिम संस्कार उनके पुणे स्थित फार्महाउस पर संपन्न होगा। उनके इस तरह चले जाने से सिनेमाप्रेमियों और उनके चाहने वालों में गहरा शोक व्याप्त है, जो हमेशा उनकी फिल्मों और उनकी सादगी भरी शख्सियत को याद रखेंगे।
