लेखपालों ने वाहन भत्ते की मांग को लेकर आंदोलन की दी चेतावनी
उत्तर प्रदेश में लेखपालों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। वाहन भत्ते की मांग को लेकर लेखपाल संघ ने 22 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपिंदर सिंह के अनुसार, लेखपाल अपने कार्यालयीन कार्य के लिए निजी वाहनों का उपयोग करते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए कोई भी वाहन भत्ता नहीं दिया जाता है। यह उनकी प्रमुख मांगों में से एक है।
गुरुवार को आलमबाग में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में, लेखपालों ने मिलने वाले स्टेशनरी भत्ते में भी बढ़ोत्तरी की मांग उठाई। संघ द्वारा मुख्य सचिव को एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें सात सूत्रीय मांगों को शामिल किया गया है। इन मांगों में राजस्व निरीक्षक और नायब तहसीलदारों के अतिरिक्त पदों का सृजन, मौजूदा नियमावली में आवश्यक संशोधन, स्थानांतरण नीति में सुधार, लेखपालों को उप राजस्व निरीक्षक का पदनाम प्रदान करना और उनके वेतनमान में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
अपनी मांगों के समर्थन में, लेखपालों ने गुरुवार को काली पट्टी बांधकर काम किया। आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों की एक विस्तृत श्रृंखला की योजना बनाई गई है। आठ दिसंबर को विधायकों और मंत्रियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 13 दिसंबर को थाना समाधान दिवस के अवसर पर भी लेखपाल काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद 20 दिसंबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक धरना प्रदर्शन किया जाएगा। 27 दिसंबर को फिर से काली पट्टी बांधकर विरोध जताया जाएगा, और 30 दिसंबर को सभी लेखपाल जिला मुख्यालय पर एकत्रित होकर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक धरना देंगे। आंदोलन का अगला चरण छह जनवरी को राजस्व परिषद का घेराव करने के साथ होगा।
संघ के नेताओं का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में, लेखपालों के पास आंदोलन के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। यह आंदोलन प्रदेश भर के लेखपालों की कार्यशैली और उनके अधिकारों से जुड़ा है, जिसका प्रभाव राजस्व कार्यों पर भी पड़ सकता है।
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