खराब आहार और जीवनशैली से लिवर कैंसर का खतरा, शोध में मेटाबालिज्म बायोमार्कर के रूप में चिह्नित
खराब आहार और बदलती जीवनशैली अब कैंसर के खतरे को बढ़ा रही हैं। हाल ही में, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण खोज की है, जिसमें मेटाबालिज्म को लिवर कैंसर के बायोमार्कर के रूप में पहचाना गया है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘एल्सेवियर’ में प्रकाशित हुआ है और इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है।
शोध के अनुसार, लिवर कैंसर में परिवर्तित मेटाबालिक मार्क एरोबिक ग्लाइकोलाइसिस को बढ़ावा देते हैं, जिससे लेक्टेट संचय और ट्यूमर की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, आंत के माइक्रोबायोम में डिसबायोसिस सूजन और मेटाबालिक परिवर्तनों के माध्यम से क्रानिक लिवर रोग और हेपटासेल्यूलर कार्सिनोमा के विकास में योगदान देता है। शोध में यह भी पाया गया कि विशिष्ट मेटाबालिट्स हेपेटासेल्यूलर कार्सिनोमा की प्रगति में बायोमार्कर के रूप में कार्य करते हैं और लक्षण चिकित्सा के दौरान रोगी स्तरीकरण में मदद करते हैं। एंजाइम, लिपिड, प्रोटीन और अमीनो एसिड से संबंधित मेटाबालिट्स का नियंत्रण सूजन फाइब्रोसिस और आनकोजेनिक सिगनलिंग मार्गों को बढ़ावा दे सकता है, जिससे मेटाबॉलिज्म डिसआर्डर की वजह से लिवर कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन लिवर कैंसर की प्रारंभिक पहचान, नए बायोमार्कर विकास, व्यक्तिगत चिकित्सा और टारगेटेड थेरेपी के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। शोध के प्रमुख, डॉ. अनुराग कुमार गौतम के अनुसार, उनका यह शोध लिवर कैंसर के उपचार में वैश्वीकरण नीति बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
इस शोध में डॉ. गौतम को लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. प्रणेश, राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के दीपांकर यादव और आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के डॉ. विजय कुमार का सहयोग मिला। उनकी इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने उन्हें बधाई दी है। सूत्रों के अनुसार, यह शोध लिवर कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने और उपचार के नए तरीके खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह शोध न केवल कैंसर के कारणों पर प्रकाश डालता है, बल्कि भविष्य में प्रभावी उपचार रणनीतियों के विकास के लिए भी मार्ग प्रशस्त करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शोध स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
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