अखिलेश का भाजपा पर वार: कफ सिरप माफिया और मतदाता सूची में साजिश का आरोप
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के बहाने साजिश रचने और चुनाव आयोग के साथ मिले होने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत का परिणाम है, जिसमें पहले फार्म बांटने में हेराफेरी होगी और फिर कलेक्शन में। यादव के अनुसार, इस प्रक्रिया से वोट देने का अधिकार छीना जाएगा और संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण को भी समाप्त करने की तैयारी है।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, अखिलेश यादव ने कोडीन कफ सिरप तस्करी के मामले में एक पूर्व सांसद का नाम जुड़ने पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि लखनऊ में गिरफ्तार ड्रग तस्कर अमित टाटा, जौनपुर के एक बाहुबली के साथ दिखते रहे हैं और उनकी गाड़ी का नंबर भी बाहुबली के काफिले की गाड़ी से मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले का मास्टरमाइंड शुभम भी उसी बाहुबली के साथ देखा गया है। इस पर भाजपा की ‘जीरो टालरेंस’ सरकार से कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने सवाल किया कि बुलडोजर कब चलेगा।
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के नारे पर पलटवार करते हुए भाजपा को ‘माफियाजीवी पार्टी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा में एनकाउंटर माफिया, कफ सिरप माफिया, नीट माफिया, स्क्रैप माफिया और थाने के लिए वसूली माफिया सक्रिय हैं। उन्होंने एसआइआर प्रक्रिया में हो रही जल्दबाजी पर भी सवाल उठाए और कहा कि सफाई कर्मचारियों को बीएलओ सहायक बनाया जा रहा है। फतेहपुर में आत्महत्या करने वाले बीएलओ के परिजनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनाव आयोग पर लगे आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि अधिकारियों पर ऐसे लोगों को ड्यूटी पर न दिखाने का दबाव है जिनकी मौत हो चुकी है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा ने नोएडा की एक सॉफ्टवेयर कंपनी को हायर किया है जो मतदाता सूची पर काम कर रही है, और इसके तहत फार्म भरने वालों का डाटा तथा मतदाताओं के मोबाइल नंबर तक देखे जा सकते हैं। सांसद राजीव राय के पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि घोसी विधानसभा क्षेत्र में 20 हजार मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं, जिसे वे लोकसभा में भी उठाएंगे। हाल ही में जान गंवाने वाले लखनऊ निवासी बीएलओ विजय वर्मा के परिवार को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने के बाद, उन्होंने सरकार से परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
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