खादी मंडप: प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के विजन का जीवंत प्रदर्शन
नई दिल्ली: प्रगति मैदान में आयोजित 44वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में खादी मंडप इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह मंडप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फार लोकल’ के विजन को साकार रूप में प्रस्तुत करता है, जहाँ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना देश के कोने-कोने से आए कारीगरों और उनके उत्पादों के माध्यम से परिलक्षित हो रही है।nnहाल नंबर छह में, खादी संस्थानों, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और स्फूर्ति क्लस्टर के तहत स्थापित इकाइयों के लगभग 150 स्टालों पर देश भर के खादी कारीगरों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत का प्रदर्शन किया है। इन स्टालों पर दस्तकारी, खादी और ग्रामोद्योग से जुड़े विविध उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। आगंतुकों को देसी चरखा, पेटी चरखा, विद्युत चालित कुम्हारी चाक और कच्ची घानी तेल निकालने की प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन देखने का अवसर मिल रहा है, जो पारंपरिक कलाओं की जीवंतता को दर्शाता है।nnखादी इंडिया मंडप की एक अनूठी पहल ‘बात खादी की’ नामक पाडकास्ट स्टूडियो है। इस स्टूडियो में, कारीगर स्वयं अपनी आवाज में अपनी यात्रा, संघर्षों, सफलताओं और अपनी परंपरागत कलाओं से जुड़ी कहानियों को साझा कर रहे हैं। यह पहल आगंतुकों को कारीगरों के जीवन और उनके काम से भावनात्मक रूप से जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।nnमंडप में वस्त्र, प्रसाधन सामग्री, ग्रामीण खाद्य पदार्थ, प्राकृतिक सौंदर्य उत्पाद, घरेलू हस्तशिल्प, बांस एवं बेंत आधारित सामग्री और पारंपरिक नक्काशीदार कलाकृतियां विशेष रूप से आगंतुकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर की बेशकीमती पश्मीना शाल और कश्मीरी परिधान, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक मिठाइयां, अचार, मुरब्बा और हस्तनिर्मित वस्तुओं ने भी दर्शकों में गहरी रुचि पैदा की है। दक्षिण भारत की प्रतिष्ठित कांचीपुरम सिल्क साड़ियां, आंध्र प्रदेश की कलात्मक लकड़ी की नक्काशी, झारखंड की प्राकृतिक स्किनकेयर शृंखला और दिल्ली, हरियाणा व पंजाब की खादी एवं हैंडलूम आधारित फैशन रेंज ने पवेलियन की विविधता को और बढ़ाया है।nnप्राकृतिक शहद, आर्गेनिक हर्बल-टी, आयुर्वेदिक मेकअप और पारंपरिक इत्र जैसे उत्पादों ने खादी और ग्रामोद्योग की आधुनिक उपयोगिता और बढ़ती स्वीकार्यता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। पूर्वोत्तर राज्यों की भागीदारी भी मंडप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही, जहाँ बांस और बेंत से बने पर्यावरण अनुकूल उत्पाद जैसे पानी की बोतलें, मंदिर के लैंप, पेन स्टैंड, बैग और चटाइयां आगंतुकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हुए हैं। यह मंडप वास्तव में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों की अदम्य भावना का एक उत्कृष्ट प्रतिबिंब है।”
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