कोहरे में ट्रेनें अब 75 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी, 250 फॉग सेफ डिवाइस तैयार
सर्दी का मौसम दस्तक दे चुका है और इसके साथ ही ट्रेनों के संचालन में कोहरे के कारण आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए रेलवे ने कमर कस ली है। पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में, विशेषकर कासगंज क्षेत्र में, कोहरे के दौरान ट्रेनों के सुरक्षित और निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 250 फॉग सेफ डिवाइस की व्यवस्था की गई है। ये आधुनिक जीपीएस-आधारित उपकरण लोको पायलटों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, जिससे कोहरे की घनी चादर में भी ट्रेनों की गति को सुरक्षित रूप से बढ़ाया जा सकता है।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, फॉग सेफ डिवाइस के उपयोग से पहले कोहरे के दौरान ट्रेनों की अधिकतम अनुमेय गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित थी। हालांकि, इस नई तकनीक के आगमन के साथ, लोको पायलट अब 75 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से ट्रेनें चला सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि कोहरे के दौरान भी ट्रेनों की गति में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि संभव है, जिससे यात्रा के समय में कमी आएगी और समय-सारणी का बेहतर पालन सुनिश्चित होगा।
इन फॉग सेफ डिवाइस का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ये लोको पायलटों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। डिवाइस लोको पायलटों को आगामी सिग्नलों की स्पष्ट जानकारी तुरंत प्रदान करता है, जिससे उन्हें निर्णय लेने में आसानी होती है और संभावित दुर्घटनाओं का खतरा कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, इस तकनीक के कारण अब फॉग सिगनल मैन भेजने की आवश्यकता भी समाप्त हो गई है, जिससे परिचालन में और अधिक दक्षता आई है।
रेलवे ने न केवल फॉग सेफ डिवाइस की उपलब्धता सुनिश्चित की है, बल्कि कोहरे के दौरान ट्रेनों के संचालन से संबंधित सावधानियों के बारे में सभी लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों को प्रशिक्षित भी किया है। पूर्ण ब्लॉक पद्धति और स्वचालित ब्लॉक पद्धति के तहत गाड़ियों के संचालन के संबंध में उन्हें विशेष परामर्श दिया गया है। इज्जतनगर मंडल के सभी रेल खंडों पर, चाहे वह यात्री ट्रेनें हों या मालगाड़ियाँ, इन फॉग पास डिवाइस का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है। सिग्नल पोस्टों पर ल्यूमिनस स्ट्रिप लगाने और समपार बैरियर पर लाइन मार्किंग जैसी अन्य सुरक्षा तैयारियों को भी पूरा कर लिया गया है, ताकि कोहरे के मौसम में यात्रियों की यात्रा सुरक्षित और आरामदायक बनी रहे।
