कोडरमा में मजदूर-किसान का हल्लाबोल: चार लेबर कोड रद्द करने की मांग
कोडरमा में मजदूरों और किसानों ने सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानूनों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। ‘गुलामी के चार लेबर कोड रद्द करो’ जैसे नारों के साथ समाहरणालय परिसर में हजारों की संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने इन कानूनों को मजदूरों के हितों के खिलाफ बताते हुए इन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की। किसानों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीटीयू) और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के देशव्यापी आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य चार लेबर कोड को रद्द करवाना और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिलाना था। प्रदर्शनकारियों ने उर्मिला चौधरी मोड़ से एक विशाल जुलूस निकाला, जो कोडरमा बाजार होते हुए जिला मुख्यालय पहुंचा और एक जनसभा में तब्दील हो गया। जुलूस के दौरान ‘मजदूर विरोधी लेबर कोड फाड़ दो’, ‘गुलामी का दस्तावेज श्रम संहिता रद्द करो’, ‘किसानों का कर्जा माफ करो’ जैसे जोशीले नारे गूंजते रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड राज्य किसान सभा के राज्य संयुक्त सचिव असीम सरकार ने की। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ये चार लेबर कोड पूंजीपति वर्ग के अधिकतम मुनाफे को सुनिश्चित करने के लिए लाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कानून मजदूरों के शोषण को और बढ़ाएंगे और उन्हें गुलामी जैसी परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर करेंगे। वक्ताओं ने 2020 के कोरोना काल में हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन और तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के संघर्ष को भी याद किया।
वक्ताओं ने झारखंड में धान खरीद की अव्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की, जिसके चलते किसान दलालों और बिचौलियों को औने-पौने दाम पर अपना अनाज बेचने को मजबूर हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर को आम आदमी के लिए ‘फांसी का फंदा’ करार दिया।
इस प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ महेंद्र तुरी, ग्यासुद्दीन अंसारी, भिखारी तुरी, शम्भु कुमार, सुरेंद्र राम, सबिता देवी, सुनील कुमार गुप्ता, दिलीप कुमार सिन्हा, सिकन्दर कुमार, नागेश्वर राम, संदीप कुमार और मो शमीम सहित कई अन्य लोग शामिल थे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन भागीरथ सिंह ने किया।
