कानपुर देहात: होली से पहले फाग गायकों की टोलियां जमा रहीं रंग, मंदिरों में गूंज रही धुनें | Kanpur Dehat Holi
कानपुर देहात में होली के पर्व से पहले ही ग्रामीण अंचलों में उत्सव का रंग घुलने लगा है। जिले के यमुना बेल्ट से जुड़े गांवों में पारंपरिक फाग गायन की धूम शुरू हो गई है। यह प्राचीन लोक कला होली के आगमन की सूचना देती है और पूरे क्षेत्र में एक विशेष उत्साह भर देती है।
यमुना बेल्ट के बैजामऊ, बेहमई, हरिहरपुर, खोजारामपुर, महेशपुर, ऊमरपुर, भाल दमनपुर, शाहजहांपुर, बिझौना जैसे गांवों में शाम होते ही फाग की जमातें सजने लगती हैं। ढोलक, हारमोनियम और झींके की थाप पर फाग गायकों की टोलियां रियाज में जुट जाती हैं। इन मधुर धुनों पर ‘होरी खेलै रघुबीरा अवध मा’ और ‘बन आए गोपी नाथ वैद्य बनवारी’ जैसे पारंपरिक गीत गाए जाते हैं, जो श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देते हैं। Kanpur Dehat Holi के इस अनूठे रंग में हर कोई सराबोर होता दिख रहा है।
रसूलाबाद कस्बे के धर्मगढ़ मंदिर में भी प्रमोद शुक्ला और महेंद्र श्रीवास्तव जैसे स्थानीय कलाकारों की टोलियां सक्रिय हो गई हैं। वे ‘मोहन नंद लाल बरसाने नहिं आए’ और ‘बमन गए ते धान श्याम मथुरा में केसर बै आए’ जैसे गीतों से माहौल को भक्तिमय और उल्लासमय बना रही हैं। इसी तरह सीधामऊ सरगांव बुजुर्ग, मुडेरा, थनवांपुर और सिहुंठा जैसे अन्य गांवों में भी फाग गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से होलियाना माहौल बनाना शुरू कर दिया है। यह सांस्कृतिक विरासत स्थानीय लोगों को एक साथ लाती है और त्योहार की खुशी को कई गुना बढ़ा देती है।
