कानपुर देहात में होली का रंग, फाग गायकों की टोलियां Kanpur Dehat Holi की धुन में मगन
कानपुर देहात में होली का त्योहार नजदीक आते ही पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बनने लगा है। होलिका दहन 3 मार्च को निर्धारित है और इसके लिए अभी से तैयारियां अपने चरम पर हैं। विशेष रूप से बुंदेलखंड की सीमा से लगे यमुना बेल्ट के गांवों में फाग गायन की परंपरा जीवंत हो उठी है। मंदिरों और आश्रमों में शाम होते ही फाग गायकों की टोलियां ढोलक, हारमोनियम और झींके जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ रियाज करने में जुट गई हैं। यह Kanpur Dehat Holi की एक अनूठी पहचान है।
यमुना बेल्ट के बैजामऊ, बेहमई, हरिहरपुर, खोजारामपुर, महेशपुर, ऊमरपुर, भाल दमनपुर, शाहजहांपुर और बिझौना जैसे गांवों में फाग की जमातें सजने लगी हैं। गायक ‘होरी खेलै रघुबीरा अवध मा’ और ‘बन आए गोपी नाथ वैद्य बनवारी’ जैसे फागों की धुनों पर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर रहे हैं। रसूलाबाद कस्बे के धर्मगढ़ मंदिर में प्रमोद शुक्ला और महेंद्र श्रीवास्तव की टोली ‘मोहन नंद लाल बरसाने नहिं आए’ तथा ‘बमन गए ते धान श्याम मथुरा में केसर बै आए’ जैसे गीतों से माहौल को भक्तिमय बना रही है। सीधामऊ सरगांव बुजुर्ग, मुडेरा, थनवांपुर और सिहुंठा जैसे अन्य गांवों में भी फाग गायकों की टोलियां फागुनी धुनें बिखेरकर पूरे इलाके को होलियाना रंग में रंग रही हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
